उत्तराखंड में खराब मौसम के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रेकिंग और पर्वतारोहण अभियान प्रभावित हुए हैं। उत्तरकाशी और बागेश्वर जिलों में कुल 179 पर्वतारोही अलग-अलग स्थानों पर रुके हुए हैं। प्रशासन की ओर से सभी को सुरक्षित वापस लाने के लिए रेस्क्यू प्लान तैयार किया गया है।

उत्तरकाशी जिले में विभिन्न ट्रैकिंग रूट और चोटियों पर 10 अलग-अलग दलों के 136 पर्वतारोही बेस कैंप सहित अन्य स्थानों पर फंसे हुए हैं। वहीं बागेश्वर जिले में तीन दलों के 43 पर्वतारोहियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया गया है। प्रशासन के अनुसार सभी पर्वतारोही फिलहाल सुरक्षित हैं और उनसे सैटेलाइट के माध्यम से संपर्क बना हुआ है।

मौसम की स्थिति को देखते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन को युद्धस्तर पर चलाया जाए।

उत्तरकाशी में कालिंदी ट्रैक पास, उडन कॉल पास, माउंट सुदर्शन, भागीरथी-2, जोगिन-1, शिवलिंग-1 व 2, सतोपंथ और श्रीकंठ जैसी चोटियों के आरोहण के लिए निकले पर्वतारोही अलग-अलग स्थानों पर रुके हुए हैं। इनमें से कई दल सितंबर महीने में ही अपने अभियान पर रवाना हुए थे।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सोमवार सुबह छह बजे से आठ हेलीकॉप्टरों के जरिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया जाए। इसके लिए यूकाडा को पर्याप्त संख्या में हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मौसम विभाग के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने और मौसम की स्थिति के अनुसार रेस्क्यू प्लान में बदलाव करने को कहा गया है।

रेस्क्यू के बाद सभी पर्वतारोहियों की तत्काल मेडिकल स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच भी की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए एम्स ऋषिकेश और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन ने रेस्क्यू अभियान के दौरान पर्वतारोहियों से संपर्क बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में सैटेलाइट फोन की उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा है। अधिकारियों के मुताबिक प्राथमिकता सभी पर्वतारोहियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना है।

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