बदरीनाथ धाम स्थित अराइवल प्लाजा में आयोजित देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। धार्मिक आयोजन के नाम पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्वरूप और प्रस्तुति पर उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत सहित संत समाज ने आपत्ति जताई है। कार्यक्रम में लोक गायक किशन महिपाल और गायिका प्रियंका महर ने प्रस्तुति दी थी। कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर विरोध और प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने कहा कि आपत्ति सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने के उद्देश्य को लेकर नहीं, बल्कि उसके स्वरूप और प्रस्तुति को लेकर है। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम देश के प्रमुख धार्मिक धामों में शामिल है और यहां की धार्मिक एवं पौराणिक मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए किसी भी कार्यक्रम की रूपरेखा तय की जानी चाहिए।

डॉ. सती के अनुसार, बदरीनाथ धाम की परंपराओं में ध्वनि और शंखनाद को लेकर विशेष धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं। ऐसे में तेज संगीत और ध्वनि से होने वाले शोर को लेकर भी विचार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण के पर्यावरणीय प्रभावों को भी ध्यान में रखने की बात कही।

महापंचायत ने कहा कि इससे पहले भी कपाट खुलने से पूर्व बदरीनाथ धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। संगठन ने मांग की है कि भविष्य में इस तरह के आयोजनों के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए, ताकि धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक मर्यादाओं का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

वहीं, ज्योतिर्मठ के स्वामी प्रत्यक्चैतन्य मुकुंदानंद गिरी महाराज ने भी कार्यक्रम को लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांस्कृतिक उत्सव के दौरान बदरीनाथ धाम की धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप करने और ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की।

स्वामी मुकुंदानंद मुकुंदानंद गिरी महाराज ने कहा कि बदरीकाश्रम को ऋषि-मुनियों की तपस्थली माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बदरीनाथ क्षेत्र में शंख बजाने को लेकर भी विशेष परंपरा बताई जाती है। उनका कहना है कि धाम की विशिष्ट धार्मिक पहचान को देखते हुए यहां होने वाले कार्यक्रमों की प्रकृति और प्रस्तुति पर विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।

इस पूरे मामले को लेकर बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला, स्वामी मुकुंदानंद गिरी महाराज और चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव बृजेश सती की ओर से धार्मिक मर्यादाओं के पालन पर जोर दिया गया है। अब मांग उठ रही है कि बदरीनाथ धाम में भविष्य में होने वाले सांस्कृतिक आयोजनों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और प्रभावी व्यवस्था तय की जाए।

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