प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामलों में तेजी लाने के लिए एक आक्रामक रणनीति तैयार की है। अक्सर यह आरोप लगते रहे हैं कि बड़े आरोपी दिग्गज वकीलों की मदद लेकर कानूनी प्रक्रियाओं को लंबा खींचते हैं, जिससे जांच का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता। लेकिन अब ED के डायरेक्टर राहुल नवीन ने इस चुनौती से निपटने के लिए कमर कस ली है। हाल ही में आईआईएम (IIM) बैंगलोर में आयोजित एजेंसी के 36वें तिमाही सम्मेलन में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अब PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत ट्रायल में तेजी लाना और मुकदमों का जल्द निपटारा करना प्राथमिकता होगी।
इस नई कार्ययोजना के तहत, प्रत्येक जोनल चीफ को अपने अधिकार क्षेत्र में कम से कम 10 ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है, जिन्हें अगले 6 से 8 महीने के भीतर अंजाम तक पहुंचाया जा सके। ED का लक्ष्य है कि जो जांच वर्तमान में 4 से 5 साल का समय लेती है, उसे घटाकर हर हाल में लगभग 18 महीने तक सीमित किया जाए। इसके साथ ही, डायरेक्टर ने अधिकारियों को डेटा सुरक्षा के प्रति बेहद सतर्क रहने की हिदायत दी है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि जांच से जुड़ी संवेदनशील और गोपनीय जानकारी किसी भी तरह से लीक नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, जो मामले 10 साल से अधिक समय से लंबित हैं, उनकी विशेष रूप से निगरानी की जाएगी।
इस बदलाव के राजनीतिक और प्रशासनिक मायने भी काफी व्यापक हैं। 2029 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर, ED की यह सक्रियता देश के कई बड़े राजनीतिक चेहरों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। राहुल गांधी, सोनिया गांधी, लालू यादव, अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन जैसे नेताओं के मामले इस नई प्रक्रिया के दायरे में आ सकते हैं। एजेंसी की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने भी बड़े कदम उठाए हैं। 1 जनवरी, 2027 से ED के स्वीकृत पदों में 60% की भारी बढ़ोतरी की जाएगी, जिससे कर्मचारियों की संख्या 2,029 से बढ़कर 3,256 हो जाएगी। साथ ही, PMLA जोन की संख्या बढ़ाकर 50 की जाएगी और फंक्शनल यूनिट्स का विस्तार भी किया जाएगा ताकि जांच की रफ्तार को बरकरार रखा जा सके।

