UCC और विविधता पर ओवैसी का बड़ा प्रहार
हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और आरएसएस (RSS) पर बेहद हमलावर रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर जारी एक वीडियो संदेश में ओवैसी ने कहा कि बीजेपी अक्सर समानता (Equality) की बड़ी-बड़ी बातें तो करती है, लेकिन वह देश की वास्तविक विविधता को समझने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक देश की ‘रंगा-रंगी’ विविधता को स्वीकार नहीं किया जाएगा, तब तक वास्तविक समानता लाना नामुमकिन है।
संविधान बनाम आरएसएस की विचारधारा पर टकराव
ओवैसी ने अपनी बात को और अधिक आक्रामक बनाते हुए कहा कि वे हेडगेवार, गोलवलकर और सावरकर की विचारधारा के अनुयायी नहीं हैं, बल्कि वे भारत के संविधान के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। उन्होंने आरएसएस के एजेंडे पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “तुम जिसे पत्थर की लकीर समझते हो, हम उसे ठोकर मारते हैं। हम संविधान को मानने वाले हैं और हम कुरान व सुन्नत की पैरवी करने वाले हैं।” इससे पहले मध्य प्रदेश की एक रैली में भी उन्होंने यूसीसी को असंवैधानिक करार दिया था और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए थे।
UCC का संवैधानिक आधार और राजनीतिक स्थिति
समान नागरिक संहिता (UCC) का मुद्दा भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 से जुड़ा है, जो राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों के तहत सरकार को पूरे देश में एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करने का निर्देश देता है। हालांकि, यह मौलिक अधिकारों की तरह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन यह सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण संवैधानिक अपेक्षा है। इस बीच, गृहमंत्री अमित शाह ने संकेत दिए हैं कि 2029 तक सभी एनडीए (NDA) शासित राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। वर्तमान में उत्तराखंड में इसे लागू किया जा चुका है, जबकि गुजरात, मध्य प्रदेश और असम जैसे राज्यों में इसकी प्रक्रिया जारी है, और राजस्थान व महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इस पर चर्चा तेज है।

