गुड़गांव के पॉश इलाके गोल्फ कोर्स रोड पर हुई एक सनसनीखेज घटना ने दिल्ली-एनसीआर की महिला बाइकर्स और साइकलिस्टों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। शिवानी चौहान उर्फ सिया, जिन्हें एक तेज रफ्तार कार ने जोरदार टक्कर मारी, ने इस घटना को महज एक दुर्घटना मानने से इनकार कर दिया है। सिया के अनुसार, यदि उन्होंने सुरक्षा के लिए राइडिंग गियर्स और हेलमेट का इस्तेमाल नहीं किया होता, तो परिणाम बहुत घातक हो सकता था। उन्होंने बताया कि टक्कर के बाद वह सड़क पर काफी दूर तक घिसटती चली गईं और महज कुछ सेकंड का अंतर उनकी जान ले सकता था।
सड़क पर असुरक्षा का माहौल: महिलाओं ने सुनाई अपनी आपबीती
इस घटना के बाद दिल्ली-एनसीआर की कई महिला राइडर्स ने सड़क पर अपने साथ होने वाले दुर्व्यवहार और असुरक्षा को लेकर खुलकर बात की है। दिल्ली से कश्मीर तक का सफर तय कर चुकीं सहर हाशमी ने बताया कि सड़कों पर अक्सर उन्हें परेशान करने की कोशिश की जाती है, और कभी-कभी तो कार सवारों का व्यवहार बेहद आपत्तिजनक होता है। वहीं, बाइकर सीमा डोरा का कहना है कि ग्रुप में राइड करना सुरक्षित महसूस होता है, लेकिन अकेले निकलते ही स्थिति बदल जाती है। उन्होंने बताया कि जैसे ही हेलमेट उतारकर पहचान जाहिर होती है, लोग उन्हें परेशान करने लगते हैं। सीमा के मुताबिक, जानबूझकर डिवाइडर के पास लाना या असुरक्षित तरीके से ओवरटेक करना अब एक आम समस्या बन गई है।
साइकलिस्टों के लिए भी जोखिम भरा है सफर
सिर्फ बाइकर्स ही नहीं, बल्कि महिला साइकलिस्टों को भी अपनी सुरक्षा के लिए जूझना पड़ रहा है। नेहा रायजादा ने साझा किया कि सड़क पर गाड़ियों का व्यवहार साइकलिस्टों के प्रति बेहद लापरवाह है। महिला साइकलिस्ट को देखकर कई वाहन चालक बहुत करीब से निकलते हैं, जिससे संतुलन बिगड़ना और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। नेहा का मानना है कि निगरानी की कमी और कानून के प्रति डर न होना इन घटनाओं का मुख्य कारण है।
“यह कोई सामान्य सड़क हादसा नहीं है, बल्कि मेरी बेटी को जान से मारने की एक सोची-समझी कोशिश थी। हम दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाकर रहेंगे।” – रोशन चौहान (पीड़िता के पिता)
इस मामले में पीड़िता के पिता रोशन चौहान ने पुलिस से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इसे ‘हत्या की कोशिश’ करार देते हुए कहा है कि वे अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। फिलहाल, पुलिस ने आरोपी को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है और मामले की गहन जांच जारी है। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या सार्वजनिक सड़कों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने हेतु कड़े नियमों और बेहतर निगरानी की तत्काल आवश्यकता है?

