हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की 8 अगस्त को हुई ‘विजय शंखनाद रैली’ के बाद कराए गए शुद्धिकरण हवन को लेकर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। 9 अगस्त को हिंदू संगठनों की ओर से रामलीला मैदान में पूजा-पाठ और हवन कराया गया। इसके बाद कांग्रेस ने इस कार्रवाई को खड़गे के दलित समाज से आने से जोड़ते हुए भाजपा और उससे जुड़े संगठनों पर जातिगत भेदभाव की मानसिकता रखने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि जिस मंच से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जनता को संबोधित किया, उसी मंच का अगले दिन ‘शुद्धिकरण’ किया जाना बेहद आहत करने वाला और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि आधुनिक लोकतांत्रिक भारत में जाति और छुआछूत के आधार पर किसी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता।
गोदियाल ने सवाल उठाया कि यदि किसी दलित नेता के संबोधन के बाद उसके मंच का शुद्धिकरण कराया जाता है तो क्या यह जातिगत भेदभाव के दायरे में नहीं आता। उन्होंने नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा की विचारधारा पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जाति और धर्म के नाम पर समाज को बांटने वाली मानसिकता लोकतांत्रिक और आधुनिक भारत के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी इस मामले का लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से विरोध करने की अपील की।
वहीं, हिंदू संगठनों ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि हवन खड़गे की जाति के कारण नहीं कराया गया, बल्कि कांग्रेस की रैली के दौरान कथित तौर पर लगाए गए इस्लामिक नारों और सनातन धर्म के अपमान के विरोध में धार्मिक अनुष्ठान किया गया। श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के न्यास सचिव राम जी अवस्थी के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन कराया गया।
भाजपा ने भी इस आयोजन से दूरी बना ली है। नैनीताल भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट ने कहा कि रामलीला मैदान में हुआ हवन भाजपा का कार्यक्रम नहीं था। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए भाजपा को मामले में घसीटने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक रामलीला मैदान धार्मिक गतिविधियों का स्थल भी है और हिंदू संगठनों ने अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वहां हवन किया।
इसी बीच कांग्रेस के एससी प्रकोष्ठ ने बुधवार को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष इंद्रपाल आर्य के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने भाजपा और सरकार के पुतलों को चप्पलों से पीटने के बाद उनका दहन किया। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा से दलित समाज और जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
विवाद के बीच खड़गे का 7 अप्रैल 2026 को असम के नीलामबाजार में दिया गया एक बयान भी चर्चा में आ गया है। उस चुनावी रैली में खड़गे ने कुरान और जहरीले सांप का उदाहरण देते हुए भाजपा और आरएसएस पर तीखी टिप्पणी की थी। हल्द्वानी की रैली के बाद उनका यह पुराना वीडियो दोबारा वायरल होने से विवाद और बढ़ गया।
मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के इतिहास में बाबू जगजीवन राम के बाद पार्टी के दूसरे दलित अध्यक्ष हैं। जगजीवन राम ने 1970-71 में कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी। खड़गे ने कर्नाटक की राजनीति से अपना सफर शुरू किया और नौ बार विधायक चुने गए। इसके बाद वे लोकसभा सांसद, लोकसभा में कांग्रेस के नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे। वर्ष 2022 में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला।
फिलहाल रामलीला मैदान में हुए शुद्धिकरण हवन को लेकर कांग्रेस, हिंदू संगठनों और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। मामला जातिगत भेदभाव का है या धार्मिक भावनाओं के विरोध का, इसे लेकर दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क दे रहे हैं।


