बागेश्वर। उत्तराखंड के बागेश्वर में सरयू और गोमती के पवित्र संगम पर रविवार को एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। जापान की रहने वाली अंग्रेजी प्रोफेसर मियाको केटलेट अपने दिवंगत अमेरिकी पति रोबर्ट केटलेट की अस्थियां लेकर बागेश्वर पहुंचीं। उनका मकसद अपने पति की उस आखिरी इच्छा को पूरा करना था, जो उनके निधन के बाद भी मियाको के दिल में जिंदा रही।

मियाको ने बागेश्वर के समण मंदिर, बिलौना में अपने पारिवारिक पुजारी की मौजूदगी में हिंदू रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पति की अस्थियों का विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद उन्होंने रोबर्ट की अस्थियों को सरयू की पवित्र धारा में प्रवाहित किया। पति की अंतिम इच्छा पूरी होने के इस पल में मियाको बेहद भावुक नजर आईं।

2005 में हुई थी मुलाकात

रोबर्ट और मियाको की कहानी करीब दो दशक पहले जापान में शुरू हुई थी। वर्ष 2005 में जापान में आयोजित एक साधना शिविर के दौरान दोनों की मुलाकात हुई। धीरे-धीरे यह मुलाकात गहरे रिश्ते में बदल गई। दोनों के बीच जीवनसाथी का रिश्ता तो बना ही, साथ ही आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति को लेकर भी गहरा जुड़ाव विकसित हुआ।

2007 में पहली बार आए थे बागेश्वर

वर्ष 2007 में रोबर्ट और मियाको बागेश्वर पहुंचे थे। हिमालय की शांत वादियां, सरयू-गोमती का संगम और यहां का आध्यात्मिक वातावरण रोबर्ट के मन में इस कदर बस गया कि बागेश्वर उनके लिए महज एक पर्यटन स्थल नहीं रहा। यह स्थान उनकी जिंदगी की खास यादों का हिस्सा बन गया।

समय के साथ दोनों ने विवाह किया और जापान में अपना जीवन बिताने लगे, लेकिन बागेश्वर से रोबर्ट का भावनात्मक रिश्ता बना रहा। बताया गया कि जीवन के अंतिम समय में भी उन्होंने इस पवित्र भूमि से जुड़ी अपनी इच्छा जाहिर की थी।

2022 में हुआ रोबर्ट का निधन

गंभीर बीमारी के चलते 2022 में रोबर्ट केटलेट का निधन हो गया। पति को खोने के बाद मियाको के लिए यह बेहद कठिन समय था, लेकिन उन्होंने रोबर्ट की आखिरी इच्छा को भुलाया नहीं। उन्होंने उनकी अस्थियां संभालकर रखीं और करीब चार साल बाद उन्हें लेकर बागेश्वर पहुंचीं।

रविवार को बागेश्वर पहुंचकर मियाको ने अपने पारिवारिक पुजारी की मौजूदगी में अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक कर्मकांड पूरे किए। वैदिक मंत्रों के बीच अस्थियों का पूजन हुआ और फिर उन्हें सरयू की धारा में प्रवाहित कर दिया गया।

आस्था, प्रेम और एक वादे की कहानी

सरयू में अस्थियां प्रवाहित करने के साथ ही रोबर्ट की वह इच्छा पूरी हो गई, जिसने उनकी पत्नी को हजारों किलोमीटर दूर जापान से उत्तराखंड तक पहुंचाया। यह कहानी सिर्फ एक अस्थि विसर्जन की नहीं, बल्कि दो अलग देशों और संस्कृतियों से आए दो लोगों के बीच बने उस रिश्ते की है, जिसे दूरी और समय भी खत्म नहीं कर सके।

अमेरिका में जन्मे रोबर्ट, जापान की मियाको और उत्तराखंड का बागेश्वर—इन तीनों ने मिलकर इस प्रेम कहानी को एक ऐसा भावुक अध्याय दिया, जिसमें एक पत्नी ने अपने दिवंगत पति की अंतिम इच्छा को वर्षों बाद भी याद रखा और उसे पूरा करने के लिए सात समंदर पार से उत्तराखंड पहुंची।

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