हरिद्वार। सावन के पावन महीने में धर्मनगरी हरिद्वार पूरी तरह शिवमय नजर आ रही है। गंगा घाटों से लेकर कांवड़ पटरी तक हर तरफ भगवा रंग दिखाई दे रहा है। देश के अलग-अलग राज्यों से लाखों शिवभक्त कंधों पर कांवड़ उठाए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। रास्ते भर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
कांवड़ यात्रा की सबसे खास तस्वीर यह है कि हरिद्वार पहुंचते ही शिवभक्तों की व्यक्तिगत पहचान जैसे पीछे छूट जाती है। घर पर कोई शिवम है, कोई कार्तिक, मोहित या राजू, लेकिन कांवड़ यात्रा शुरू होते ही सभी एक-दूसरे के लिए सिर्फ ‘भोला’ बन जाते हैं। यही संबोधन यात्रा के दौरान उनकी थकान दूर करने और हौसला बढ़ाने का माध्यम भी बन गया है।
घर से निकलते समय परिवार और दोस्त भले ही उन्हें उनके नाम से पुकारते हों, लेकिन कांवड़ यात्रा में कदम रखते ही साथी कांवड़ियों की जुबान पर एक ही नाम होता है—‘भोला’। रास्ते में कोई साथी को पानी पिलाता है तो कोई कांवड़ संभालने में मदद करता है। थकान के बीच एक-दूसरे से कहा जाता है—‘चल भोले, थोड़ा और चलना है।’ यही अपनापन लंबी यात्रा को आसान बना देता है।
कांवड़ मेले में जाति, उम्र, शहर और सामाजिक पहचान का अंतर भी मानो खत्म हो जाता है। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे शिवभक्त एक ही भगवा रंग में नजर आ रहे हैं। सभी की मंजिल अलग हो सकती है, लेकिन आस्था का केंद्र एक ही है—भगवान शिव।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर प्रशासन की नजर
इधर, कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने जिले में चल रही कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने सीसीआर में स्थापित सीसीटीवी नियंत्रण कक्ष का निरीक्षण किया और अधिकारियों को कैमरों तथा ड्रोन के माध्यम से पूरे क्षेत्र की निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने यात्रा मार्ग, पार्किंग स्थलों और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखने के साथ श्रद्धालुओं की आवाजाही, भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को अधिक भीड़ वाले स्थानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने और भीड़ का व्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
डीएम ने कहा कि पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि कांवड़ मेले के बाद कुछ अंतराल पर ही कुंभ का आयोजन होना है। ऐसे में कांवड़ मेले के दौरान सामने आने वाली सभी कमियों और चुनौतियों को संबंधित विभाग सूचीबद्ध करें, ताकि आगामी कुंभ की तैयारियों में उन्हें दूर किया जा सके।
प्रशासन का फोकस इस समय श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही, भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी पर है।


