हरिद्वार। गंगा एक्सप्रेसवे को अब हरिद्वार तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच समझौता (एमओयू) हो चुका है। समझौते के तहत एक्सप्रेसवे को हरिद्वार से जोड़ने के लिए दोनों राज्यों की जिम्मेदारियां भी तय कर दी गई हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण की मुख्य जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण की होगी। प्रस्तावित मार्ग उत्तर प्रदेश के बिजनौर क्षेत्र से होते हुए हरिद्वार तक पहुंचेगा। इसकी लंबाई करीब 30 किलोमीटर बताई जा रही है।
उत्तराखंड पर नहीं पड़ेगा निर्माण का वित्तीय भार
समझौते की सबसे अहम बात यह है कि हरिद्वार तक एक्सप्रेसवे के निर्माण का वित्तीय भार उत्तराखंड सरकार पर नहीं आएगा। उत्तराखंड सरकार की ओर से परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और विभिन्न यूटिलिटी को शिफ्ट करने में सहयोग किया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, दोनों राज्यों के बीच इस परियोजना को लेकर पिछले महीने ही सहमति बन गई थी। संबंधित एमओयू को अंतिम रूप देने के बाद इसे कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है।
बैठकों का दौर जारी
हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने को लेकर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच कई स्तर पर बैठकें हो चुकी हैं। हरिद्वार जिला प्रशासन के अधिकारियों से भी परियोजना को लेकर चर्चा की गई है। अब दोनों राज्यों की तय भूमिका के अनुसार आगे की प्रक्रिया को गति दी जाएगी।
धार्मिक पर्यटन से उद्योग तक मिलेगा फायदा
गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक पहुंचने से क्षेत्र के विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी से हरिद्वार के धार्मिक पर्यटन, औद्योगिक निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना भी है।
हरिद्वार को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की यह योजना उत्तराखंड के लिए बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


