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    Home»उत्तराखंड»मुख्यमंत्री धामी ने जनजाति कल्याण विभाग की गेम चेंजर योजनाओं की समीक्षा की
    उत्तराखंड

    मुख्यमंत्री धामी ने जनजाति कल्याण विभाग की गेम चेंजर योजनाओं की समीक्षा की

    Amit ThapliyalBy Amit ThapliyalMarch 28, 2025No Comments4 Mins Read
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    मुख्यमंत्री ने विभिन्न गेम चेंजर योजनाओं की समीक्षा की

    जनसेवा से जुड़े कार्यों का बेहतर रिजल्ट नजर आए-सीएम

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में समाज कल्याण, महिला सशक्तिकरण के साथ ही जनजाति कल्याण विभाग की गेम चेंजर योजनाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विभागीय समीक्षा बैठकों में लिए जाने वाले जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कारगर व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। ऐसी योजनाओं पर कैबिनेट में लाए जाने से पूर्व जन सुझावों पर तथा अच्छी सोच व नियत के साथ कार्यों की गुणवत्ता पर ध्यान देने की भी बात मुख्यमंत्री ने कही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसेवा से जुड़े कार्यों का बेहतर रिजल्ट उपलब्ध कराना अधिकारियों का उद्देश्य होना चाहिए उन्होंने सभी लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने तथा विभागों के आउटपुट का भी परीक्षण करने को कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य के विकास के प्रति समर्पित एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि अधिकारी राज्य हित में बेहतर कार्य कर सकें इसके लिए उन्हें बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। यदि सभी एकजुट होकर मन से कार्य करेंगे तो हम राज्य का बेहतर विकास कर सकेंगे। उन्होंने भविष्य में अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था पर भी रोक लगाए जाने की बात कही।

    मुख्यमंत्री ने कहा हमारे बुजुर्गों को प्रतिमाह समय पर पेंशन मिले इसके लिए अब प्रतिमाह मुख्यमंत्री के संदेश के साथ निर्धारित तिथि को वृद्धावस्था पेंशन वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों में अकेले रह रहे बुजुर्गों की उचित देखभाल के लिए भी प्रभावी प्रयासों की जरुरत बताते हुए कहा कि इसमें आंगनबाड़ी केन्द्रों को भी सहयोगी बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने नशा मुक्त उत्तराखण्ड योजना के तहत बनाए जा रहे केन्द्रों के रखरखाव तथा योजना के प्रभावी प्रचार प्रसार पर ध्यान देने को उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी निकट भविष्य में हलद्वानी में स्थापित केन्द्र का निरीक्षण करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग के अन्तर्गत दी जाने वाली विभिन्न प्रकार की पेंशन के लिए लाभार्थियों को दिए जाने वाले सर्टिफिकेट आसानी से बनाए जाने, विभाग द्वारा संचालित आई०टी०आई० से अधिक से अधिक प्लेसमेंट की व्यवस्था, वृद्ध और निराश्रित व्यक्तियों के लिए आश्रय गृह प्रदान करने के लिये प्रदेश में शेल्टर होम तथा उनके संचालन की भी कारगर व्यवस्था बनाए जाने को कहा उन्होंने सामान्य आईटीआई की भांति समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित आईटीआई का भी औद्योगिक प्रतिष्ठानों के साथ समन्वय बनाए जाने को कहा।

    मुख्यमंत्री ने नियोजन विभाग द्वारा जारी अध्ययन रिपोर्ट में औसत प्रदर्शन वाली योजनाओं को और अधिक जन उपयोगी बनाए जाने को कहा। पूर्व माध्यमिक छात्रवृत्ति योजना, अटल आवास योजना तथा एससी वर्ग के लिए निर्मित योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार की भी मुख्यमंत्री ने जरुरत बताई।

    बाल विकास एवं महिला कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अभी भी 46 प्रतिशत महिलायें एनिमीक हैं। इसे कम करने के लिए विभाग ठोस कार्ययोजना बनाए। मुख्यमंत्री महिला पोषक योजना के माध्यम से एनिमिया के केसों को कैसे कम किया जा सकता है इस पर ध्यान दिया जाए। दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी से पहले नजदीकी सरकारी चिकित्सालयों में देख-रेख हेतु उचित व्यवस्था बनाए जाने के भी निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग द्वारा महिलाओं के आजीविका संवर्धन हेतु चलाई जा रही महिला समेकित योजना, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना, नंदा गौरा योजना, कार्यशील महिला छात्रावास योजना जैसी योजनाओं के बेहतर प्रदर्शन पर ध्यान दिया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री जच्चा बच्चा शुभ जीवन प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार प्रोत्साहन योजना तथा कामकाजी महिला छात्रावासों के निर्माण पर भी समयबद्धता के साथ कार्य किए जाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने दिव्यांगजनों तथा छात्रों के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं पर भी ध्यान देने के साथ नशा मुक्त भारत अभियान, शिल्पी ग्राम योजना, भारत सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की भी समीक्षा की तथा कार्यों में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हो रहे डेमोग्राफिक चेंज की स्थिती पर भी ध्यान दिए जाने की जरुरत है, उन्होंने कहा कि भारत की जनसंख्या वर्ष 2000 में 105.79 करोड़ थी, जो वर्ष 2023 में 143.81 करोड़ हो गई है जबकि उत्तराखण्ड की आबादी वर्ष 2000 में 84 लाख थी जो वर्ष 2023 में 1.275 करोड़ हो गई है। राष्ट्रीय स्तर पर यह बढ़ोतरी 35 प्रतिशत तो उत्तराखण्ड के परिदृश्य में 51 प्रतिशत है।

    बैठक में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य, उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव चंद्रेश कुमार यादव, डॉ. नीरज खैरवाल, निदेशक बाल विकास प्रशांत आर्य, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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