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    Home»उत्तराखंड»हरिद्वार भूमि घोटाला: धामी सरकार का सबसे बड़ा एक्शन, डीएम समेत कई अधिकारियों पर गिरी गाज
    उत्तराखंड

    हरिद्वार भूमि घोटाला: धामी सरकार का सबसे बड़ा एक्शन, डीएम समेत कई अधिकारियों पर गिरी गाज

    adminBy adminJune 20, 2026No Comments4 Mins Read
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    हरिद्वार भूमि घोटाला: धामी सरकार का सबसे बड़ा एक्शन, डीएम समेत कई अधिकारियों पर गिरी गाज
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    हरिद्वार नगर निगम की भूमि खरीद में सामने आए करोड़ों रुपये के घोटाले ने उत्तराखंड प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस मामले में जिस तरह की सख्त कार्रवाई की है, उसे उत्तराखंड के इतिहास की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है। पहली बार इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एक साथ कठोर कदम उठाए गए हैं।

    मामला उस समय चर्चा में आया जब नगर निगम हरिद्वार द्वारा लगभग 15 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि को करीब 54 करोड़ रुपये में खरीदने का आरोप सामने आया। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी, एसडीएम अजयवीर सिंह समेत एक दर्जन से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था।

    जांच में सामने आई मिलीभगत

    सरकार ने मामले की गहन जांच के लिए सचिव रणवीर सिंह चौहान को जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने मौके पर पहुंचकर दस्तावेजों और भूमि खरीद प्रक्रिया का विस्तृत परीक्षण किया। शासन को सौंपी गई उनकी रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा बदल दी और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का मजबूत आधार तैयार किया।

    इसके बाद विभागीय जांचों के साथ-साथ मुख्यमंत्री के निर्देश पर विजिलेंस जांच भी शुरू हुई। विभिन्न स्तरों पर हुई जांच में अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत, नियमों की अनदेखी और सुनियोजित षड्यंत्र के संकेत मिले। जांच के दायरे में आए अधिकांश अधिकारी पिछले एक वर्ष से अधिक समय से निलंबित चल रहे हैं।

    उत्तराखंड में दूसरी बार डीएम पर बड़ी कार्रवाई

    राज्य गठन के बाद यह दूसरा अवसर है जब किसी जिलाधिकारी के खिलाफ इतनी गंभीर कार्रवाई हुई है। इससे पहले वर्ष 2002 में पटवारी भर्ती घोटाले के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी एस.के. लाम्बा पर कार्रवाई हुई थी। उस समय भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं पाए जाने के बाद उन्हें पहले निलंबित किया गया और बाद में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

    पहली बड़ी जिम्मेदारी में ही विवादों में आए आईएएस अधिकारी

    हरिद्वार भूमि प्रकरण में जिन अधिकारियों के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं, उनमें आईएएस अधिकारी कर्मेन्द्र सिंह और वरुण चौधरी शामिल हैं। दोनों अधिकारियों को पहली बार फील्ड में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

    2011 बैच के आईएएस कर्मेन्द्र सिंह वर्ष 2020 में उत्तर प्रदेश कैडर से उत्तराखंड आए थे। वे लंबे समय तक उत्तराखंड लोक सेवा आयोग में सचिव और बाद में कार्मिक विभाग में अपर सचिव के पद पर कार्य कर चुके थे। हरिद्वार में जिलाधिकारी के रूप में उनकी यह पहली बड़ी फील्ड पोस्टिंग थी। सरकार ने उन पर भरोसा जताते हुए राज्य के सबसे महत्वपूर्ण जिलों में से एक हरिद्वार की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन भूमि खरीद विवाद ने उनके प्रशासनिक करियर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

    वहीं 2017 बैच के आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी पहले सिटी मजिस्ट्रेट हरिद्वार, एसडीएम ऋषिकेश तथा मुख्य विकास अधिकारी के रूप में पिथौरागढ़ और चमोली में सेवाएं दे चुके हैं। नगर आयुक्त हरिद्वार के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान ही विवादित भूमि खरीद हुई थी। जांच एजेंसियां अब उनकी भूमिका की भी विस्तार से जांच कर रही हैं।

    इसके अलावा 2017 बैच के पीसीएस अधिकारी अजयवीर सिंह, जो उस समय हरिद्वार में एसडीएम के पद पर तैनात थे, भी जांच के घेरे में हैं। इससे पहले वे श्रीनगर और कीर्तिनगर में एसडीएम के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।

    वर्षों तक याद रखी जाएगी कार्रवाई

    राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि हरिद्वार भूमि घोटाले में हुई कार्रवाई उत्तराखंड शासन-प्रशासन के इतिहास में एक मिसाल के रूप में दर्ज होगी। मुख्यमंत्री धामी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का हवाला देते हुए साफ संकेत दिया है कि किसी भी स्तर पर सरकारी धन के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच अभी भी जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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