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    Home»उत्तराखंड»शहीद जगेंद्र सिंह की मां का दर्द, उठ जा मेरे जग्गी, तेरे लिए चाय बनाती हूं…डॉक्टरों इसका इलाज करो
    उत्तराखंड

    शहीद जगेंद्र सिंह की मां का दर्द, उठ जा मेरे जग्गी, तेरे लिए चाय बनाती हूं…डॉक्टरों इसका इलाज करो

    adminBy adminFebruary 26, 2022No Comments2 Mins Read
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    शहीद जगेंद्र सिंह की मां का दर्द, उठ जा मेरे जग्गी, तेरे लिए चाय बनाती हूं…डॉक्टरों इसका इलाज करो
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    20 फरवरी को उत्तराखंड डोईवाला के निवासी जगेंद्र सिंह चौहान सियाचिन में ड्यूटी में गश्त करने के दौरान ग्लेशियर टूटने से चोटिल हो गए थे। जिनका अस्पताल में उपचार के दौरान 21 फरवरी को निधन हो गया था। उनकी शहादत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पत्नी और मां का रो रोकर बुरा हाल है। डोईवाला क्षेत्र समेत पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर है। आपको बता दें कि 20 फरवरी की रात शहीद की शहादत की सूचना परिवार को रात 11:45 बजे दी गई जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। बता दें कि शहीद गजेंद्र के पिता सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर के पद से रिटायर्ड हैं उनका नाम राजेंद्र सिंह चौहान है। शहीद की मां विमला चौहान, पत्नी किरन चौहान, भाई अजेंद्र और मनमोहन चौहान का रो रोकर बुरा हाल है।आपकों बता दें कि शहीद की शादी 4 साल पहले हुई थी लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थई। आगे पढ़ें:

    यह भी पढ़ें: रुद्रप्रयाग में चुनावी फायदे के लिए यूकेडी प्रत्याशी ने खुद पर हमले की साजिश रची थी: पुलिस

    बेटे के पार्थिव शरीर को देख मां चिल्ला उठी। मेरे जग्गी उठ मेरे जग्गी तेरे लिए चाय बनाती हूं। तुझे चाय बनाती हूं तुझे चाय बहुत पसंद है ना उठ जा बाबा, उठ चाय बनाकर ला रहीहूं.शहीद की मां चिल्ला कर बोली जग्गी उठ जा। डॉक्टरों कुछ करो मेरे जग्गी का ऑपरेशन करो। कुछ करो। शहीद की पत्नी बोली मुझे मेरा जग्गी चाहिए। शहीद की पत्नी चिल्ला कर बोली पापा, मामा जी उठाओ ना आप जग्गी को. मुझे मेरा जग्गी चाहिए जैसा था वैसी चाहिए. ये सुन वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गए। आपको बता दें कि आज शुक्रवार को शहीद जगेंद्र सिंह चौहान का पार्थिव शरीर उनके आवास पर कान्हरवाला डोईवाला लाया गया, जहां पर सेना की ओर से सलामी देने के बाद शहर वासियों की ओर से बलिदानी के पार्थिव शरीर को उनके आवास से लेकर भानियावाला तिराहे तक अपने कंधों में उठाकर ले जाया गया और भारत माता की जय, शहीद जगेंद्र सिंह अमर रहे के नारों के बीच अंतिम विदाई दी गई। इसके बाद शहीद के पार्थिव शरीर को हरिद्वार स्थित घाट पर ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।

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