कर्नाटक के बागलकोट से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और राजनीतिक रसूख की नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बागलकोट की वाम्बे कॉलोनी स्थित ‘नम्मा क्लीनिक’ में तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता यरगल पर ड्यूटी से लंबे समय तक गायब रहने के बावजूद सरकारी वेतन लेने का संगीन आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि डॉ. अंकिता, कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी हैं और उनके पिता राजकुमार यरगल जिले के स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) के पद पर तैनात हैं। आरोप है कि मार्च से सितंबर तक क्लीनिक में अनुपस्थित रहने के बावजूद उन्हें हर महीने 70 हजार रुपये से अधिक का वेतन मिलता रहा।
मामले की गहराई से जांच करने पर पता चला है कि डॉ. अंकिता ने एक निजी मेडिकल कॉलेज में फुल-टाइम पोस्टग्रेजुएशन (PG) कोर्स में दाखिला तो ले लिया, लेकिन उन्होंने सरकारी नौकरी से इस्तीफा नहीं दिया। इस ‘दोहरी व्यस्तता’ के कारण न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन हुआ, बल्कि क्लीनिक में डॉक्टर की अनुपस्थिति से स्थानीय मरीजों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जिला पंचायत CEO गजानन बाले ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। डॉ. अंकिता 15 सितंबर को हुई विभागीय सुनवाई में भी उपस्थित नहीं हुईं, जिसके बाद अब उन्हें 18 सितंबर को जिला पंचायत कार्यालय में पेश होने का अंतिम नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि वह अगली सुनवाई में नहीं आती हैं, तो उनके खिलाफ एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस विवाद के गहराते ही स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कदम उठाना शुरू कर दिया है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी राजकुमार यरगल ने डॉ. अंकिता को तत्काल प्रभाव से ड्यूटी से हटाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन अब न केवल उनके द्वारा अनधिकृत रूप से लिए गए वेतन की पूरी राशि की वसूली (Recovery) करने की तैयारी में है, बल्कि यह मामला कर्नाटक मेडिकल काउंसिल (KMC) और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) तक भी पहुंच सकता है। यदि जांच में पेशेवर आचार संहिता का उल्लंघन साबित होता है, तो उनका मेडिकल लाइसेंस भी खतरे में पड़ सकता है। हालांकि, डॉ. अंकिता के पिता ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए कहा है कि उनकी नियुक्ति उनके पद संभालने से पहले हुई थी और उन्होंने अपनी बेटी को ड्यूटी से हटाने के निर्देश भी दिए हैं।

