श्रावण मास में शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा को देखते हुए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली प्रशासन ने व्यापक ट्रैफिक प्रबंधन योजना लागू की है। 29 जुलाई से मेरठ एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून हाईवे (NH-58/NH-34 के प्रभावित हिस्सों) पर भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य लाखों कांवड़ यात्रियों की सुरक्षित और सुचारु यात्रा सुनिश्चित करना है।

भारी वाहनों पर रहेगा प्रतिबंध

प्रशासन के अनुसार 29 जुलाई से ट्रक, ट्रेलर, डंपर और अन्य भारी व्यावसायिक वाहनों को मेरठ एक्सप्रेसवे और कांवड़ मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं होगी। जरूरत पड़ने पर इन वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा। इसके अलावा भीड़ बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त डायवर्जन भी लागू किए जा सकते हैं।

क्या दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जा सकेंगे कांवड़िए?

नहीं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ यात्रियों (पैदल और उनके साथ चलने वाले वाहनों) की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। इसका कारण यह है कि यह हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे है और यहां कांवड़ यात्रियों की आवाजाही सुरक्षा के लिहाज से जोखिमपूर्ण मानी गई है। कांवड़ियों के लिए पारंपरिक कांवड़ मार्ग और निर्धारित हाईवे का ही उपयोग कराया जाएगा।

आम यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?

  • मेरठ एक्सप्रेसवे और कांवड़ मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेंगे।
  • दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, हरिद्वार और देहरादून जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।
  • बस सेवाओं और मालवाहक वाहनों के रूट में भी बदलाव किया जा सकता है।
  • भीड़ बढ़ने पर स्थानीय पुलिस स्थिति के अनुसार अस्थायी रूप से कुछ मार्गों को बंद भी कर सकती है।

यात्रियों के लिए सलाह

यदि आप 29 जुलाई के बाद दिल्ली, मेरठ, हरिद्वार, ऋषिकेश या देहरादून की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा से पहले संबंधित जिले की ट्रैफिक एडवाइजरी अवश्य देखें। वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और अनावश्यक रूप से कांवड़ मार्ग पर जाने से बचें। इससे आपकी यात्रा सुरक्षित और समयबद्ध रहेगी।

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