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    Home»उत्तराखंड»देहरादून में राहुल गांधी का 51 मिनट का ‘वन मैन शो’, पेपर लीक पर छात्रों का दर्द सुन बोले- मेहनत नहीं, सिस्टम फेल हो रहा है
    उत्तराखंड

    देहरादून में राहुल गांधी का 51 मिनट का ‘वन मैन शो’, पेपर लीक पर छात्रों का दर्द सुन बोले- मेहनत नहीं, सिस्टम फेल हो रहा है

    adminBy adminJuly 18, 2026No Comments5 Mins Read
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    देहरादून में राहुल गांधी का 51 मिनट का ‘वन मैन शो’, पेपर लीक पर छात्रों का दर्द सुन बोले- मेहनत नहीं, सिस्टम फेल हो रहा है
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    उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शुक्रवार को कांग्रेस के “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लगभग 51 मिनट तक युवाओं से सीधा संवाद किया। यह कार्यक्रम पूरी तरह देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर केंद्रित रहा। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कार्यक्रम में पहुंचे और पूरे समय राहुल गांधी की बातों को ध्यान से सुनते रहे।

    कार्यक्रम की शुरुआत किसी राजनीतिक भाषण से नहीं बल्कि छात्रों की समस्याओं और उनके संघर्षों से हुई। राहुल गांधी ने मंच से साफ कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं बल्कि उन लाखों युवाओं की आवाज है, जिनकी मेहनत पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण बर्बाद हो रही है।

    “एक पेपर लीक पूरे परिवार के सपनों को तोड़ देता है”

    राहुल गांधी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाला एक छात्र औसतन चार से पांच साल तक अपना सामान्य जीवन छोड़कर मेहनत करता है। इस दौरान पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से उसका साथ देता है। उन्होंने दावा किया कि एक अभ्यर्थी की तैयारी पर परिवार का करीब नौ लाख रुपये तक खर्च हो जाता है, लेकिन एक पेपर लीक उसकी वर्षों की मेहनत और सपनों को खत्म कर देता है।

    उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 बार पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं। यानी औसतन हर महीने एक बड़ा पेपर लीक होता है, लेकिन दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती।

    छात्रों और अभिभावकों की पीड़ा को मंच पर लाया गया

    कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद आत्महत्या करने वाली देहरादून की छात्रा रिया थापा के पिता राजेश गुरुंग मंच पर पहुंचे। अपनी बेटी को याद करते हुए वह भावुक हो गए और रो पड़े।

    उन्होंने बताया कि परीक्षा देकर लौटने के बाद रिया बेहद खुश थी और उसे भरोसा था कि उसका चयन हो जाएगा। लेकिन जब पेपर लीक की खबर सामने आई तो वह पूरी तरह टूट गई। उसने अपने पिता से कहा था, “पापा, हमारे साथ धोखा हुआ है।” कुछ समय बाद उसने आत्महत्या कर ली।

    राहुल गांधी ने कहा कि रिया अकेली नहीं थी, बल्कि ऐसे कई परिवार हैं जिन्होंने पेपर लीक की वजह से अपने बच्चों को खो दिया या उन्हें मानसिक अवसाद में जाते देखा।

    “देश में पेपर लीक का पूरा मेन्यू तैयार है”

    राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में पेपर लीक एक संगठित कारोबार बन चुका है। उन्होंने कहा कि विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों की कीमतें तक तय हैं।

    उनके अनुसार:

    • NEET पेपर – लगभग 40 लाख रुपये
    • IIT प्रवेश परीक्षा – लगभग 15 लाख रुपये
    • उत्तराखंड पटवारी भर्ती – लगभग 15 लाख रुपये
    • बिहार बेसिक शिक्षक भर्ती – लगभग 10 लाख रुपये
    • सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा – लगभग 25 लाख रुपये

    उन्होंने आरोप लगाया कि पैसे देने वालों को माफिया मोबाइल पर पेपर उपलब्ध करा देते हैं, जबकि ईमानदारी से मेहनत करने वाले लाखों छात्रों के साथ अन्याय होता है।

    “सरकार की जिम्मेदारी है परीक्षा कराना”

    राहुल गांधी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का संचालन निजी कंपनियों के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा कराना सरकार की जिम्मेदारी है और यदि कहीं पेपर लीक होता है तो संबंधित अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    उन्होंने छात्र-केंद्रित परीक्षा प्रणाली की वकालत करते हुए कहा कि प्रश्नपत्र पूरी तरह सुरक्षित हों, रैंडमाइजेशन की व्यवस्था लागू हो और विश्वविद्यालयों व शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाए। उनके अनुसार कुलपति और शिक्षा संस्थानों के प्रमुखों की नियुक्ति योग्यता के आधार पर होनी चाहिए, न कि राजनीतिक आधार पर।

    “रोजगार के चार दरवाजे बंद”

    राहुल गांधी ने युवाओं के रोजगार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश में रोजगार के पांच प्रमुख रास्ते हैं—विनिर्माण, उद्यमिता, कॉर्पोरेट क्षेत्र, निजी क्षेत्र और सरकारी नौकरी।

    उनका आरोप था कि इनमें से चार क्षेत्रों में अवसर लगातार कम हो रहे हैं और सरकारी नौकरी ही एकमात्र विकल्प बचता है। लेकिन वहां भी योग्य उम्मीदवारों के बजाय पेपर लीक और भ्रष्टाचार के जरिए लोगों को प्रवेश मिल रहा है।

    ऑनलाइन शिक्षक अभिनय शर्मा ने भी उठाए सवाल

    कार्यक्रम में प्रसिद्ध ऑनलाइन गणित शिक्षक अभिनय शर्मा भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक विचारधारा के कारण नहीं बल्कि छात्रों की पीड़ा के कारण मंच पर आए हैं।

    उन्होंने कहा कि यदि पेपर लीक के लिए शिक्षा मंत्री जिम्मेदार नहीं हैं तो फिर जवाबदेही किसकी होगी। उन्होंने नई शिक्षा नीति के पूर्ण क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई परीक्षाओं में गलत प्रश्न पूछे जाते हैं और आपत्ति दर्ज कराने के लिए भी छात्रों से 250 रुपये तक की फीस वसूली जाती है, जो अनुचित है।

    छात्रों ने सुनाई अपनी कहानी

    मंच पर उत्तराखंड के मनीष कांडपाल, आरती भंडारी, बिहार के आशु नारंग सहित कई अभ्यर्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। उत्तराखंड पटवारी भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों ने बताया कि वर्षों की तैयारी के बाद जब परीक्षा दी तो बाद में पता चला कि प्रश्नपत्र लीक हो चुका था।

    बिहार से आए छात्र ने कहा कि एक ही भर्ती परीक्षा का पेपर तीन बार लीक हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस बीमारी का इलाज क्या है और मेहनत करने वाले छात्रों को न्याय कब मिलेगा।

    बारिश भी नहीं रोक सकी युवाओं का उत्साह

    कार्यक्रम के दौरान लगातार बारिश होती रही, लेकिन युवाओं का उत्साह कम नहीं हुआ। राहुल गांधी के मंच पर पहुंचने से पहले ही पूरा पंडाल भर चुका था। कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई और बाद में राहुल गांधी ने करीब एक घंटे तक छात्रों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।

     

    देहरादून का यह कार्यक्रम पूरी तरह छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्रित रहा, जिसमें कांग्रेस ने युवाओं की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने का प्रयास किया। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करना और मेहनत करने वाले छात्रों को न्याय दिलाना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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