भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के गौरवशाली इतिहास में शनिवार का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। देश को पहली बार आईएमए से प्रशिक्षित नौ महिला सैन्य अधिकारी मिलीं, जिन्होंने पासिंग आउट परेड (पीओपी) में अंतिम पग पार कर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में अपने सैन्य जीवन की शुरुआत की। राष्ट्रपति एवं भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर Droupadi Murmu की मौजूदगी में आयोजित इस भव्य समारोह ने भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और बदलते भारत की नई तस्वीर को सामने रखा।

अनुशासन, पराक्रम और गौरव का अद्भुत संगम

आईएमए के ऐतिहासिक ड्रिल स्क्वायर पर सुबह से ही उत्साह, गौरव और देशभक्ति का माहौल देखने को मिला। सुबह 6:40 बजे पासिंग आउट परेड का शुभारंभ हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू चैटवुड भवन पहुंचीं और परेड की सलामी ली। इस अवसर पर Gurmit Singh, Pushkar Singh Dhami, सेना के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में कैडेट्स के परिजन उपस्थित रहे।

सुसज्जित सैन्य वर्दी में कदमताल करते जेंटलमैन और महिला कैडेट्स ने उत्कृष्ट अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण का प्रदर्शन किया। परेड के दौरान पूरे परिसर में देशभक्ति और गर्व का वातावरण छाया रहा।

पहली बार महिला कैडेट्स ने पार किया ‘अंतिम पग’

समारोह का सबसे ऐतिहासिक और भावुक क्षण वह रहा जब पहली बार आईएमए से प्रशिक्षित नौ महिला कैडेट्स ने ‘अंतिम पग’ पार कर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में प्रवेश किया। यह केवल आईएमए ही नहीं, बल्कि भारतीय सेना के इतिहास में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

महिला अधिकारियों की यह पहली खेप सेना में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन अधिकारियों ने कठोर सैन्य प्रशिक्षण, शारीरिक दक्षता और नेतृत्व की सभी चुनौतियों को सफलतापूर्वक पूरा कर यह उपलब्धि हासिल की है।

515 कैडेट्स ने पूरी की सैन्य प्रशिक्षण यात्रा

इस वर्ष की पासिंग आउट परेड में कुल 515 कैडेट्स शामिल हुए। इनमें 481 भारतीय कैडेट्स तथा 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट्स शामिल थे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सभी कैडेट्स अब अपने-अपने देशों की सेनाओं में अधिकारी के रूप में सेवाएं देंगे।

आईएमए में प्रशिक्षण प्राप्त विदेशी कैडेट्स वर्षों से भारत और मित्र देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने का माध्यम रहे हैं। इस बार भी कई देशों के युवा सैन्य अधिकारियों ने यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने देशों की सैन्य सेवाओं में योगदान देने के लिए कदम बढ़ाया।

पीपिंग सेरेमनी में सजे सितारे

पासिंग आउट परेड के बाद आयोजित पारंपरिक पीपिंग सेरेमनी में नव नियुक्त सैन्य अधिकारियों के कंधों पर रैंक सजाई गई। यह क्षण कैडेट्स और उनके परिवारों के लिए बेहद भावुक और गर्व से भरा रहा। वर्षों की मेहनत, अनुशासन और त्याग के बाद परिवारों ने अपने बेटों और बेटियों को भारतीय सेना के अधिकारी के रूप में देखा।

कई परिवारों की आंखें खुशी से नम हो गईं, जबकि पूरा परिसर तालियों और शुभकामनाओं से गूंज उठा।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा—यह बदलते भारत की तस्वीर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिला अधिकारियों के पासआउट होने को भारतीय सशस्त्र बलों में बढ़ते समावेश और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की यह उपलब्धि नए भारत की बदलती सोच, समान अवसरों और सशक्तिकरण का प्रतीक है।

उन्होंने सभी नव नियुक्त अधिकारियों को राष्ट्रसेवा, अनुशासन और नेतृत्व की भावना के साथ कार्य करने का संदेश दिया।

राष्ट्रपति का देहरादून दौरा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार को ही देहरादून पहुंच गई थीं। Jolly Grant Airport पर उनका स्वागत राज्यपाल गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, वरिष्ठ मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने किया। इसके बाद राष्ट्रपति राष्ट्रपति निकेतन पहुंचीं, जहां उन्होंने विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात की।

दूसरा अवसर जब महिला राष्ट्रपति ने ली परेड की सलामी

आईएमए के इतिहास में यह दूसरा अवसर था जब किसी महिला राष्ट्रपति ने पासिंग आउट परेड की सलामी ली। इससे पहले भारत की पूर्व राष्ट्रपति Pratibha Patil भी आईएमए की पीओपी में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो चुकी हैं।

आईएमए की यह पासिंग आउट परेड केवल एक सैन्य समारोह नहीं रही, बल्कि भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और बदलते सामाजिक परिदृश्य का ऐतिहासिक प्रतीक बन गई। पहली बार नौ महिला सैन्य अधिकारियों का भारतीय सेना में शामिल होना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

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