उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में महिलाओं की भागीदारी को लेकर एक अहम घोषणा की गई। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि अब छात्र संघ चुनावों में छात्राओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। यह घोषणा नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान की गई, जिसे राज्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यदि महिलाओं को अवसर मिले तो वे नेतृत्व के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करती हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि आधी आबादी को उनका अधिकार मिले और वे हर क्षेत्र में बराबरी से भागीदारी निभाएं। इसी सोच के तहत शिक्षा और सहकारिता जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं।

शिक्षा मंत्री ने सहकारी समितियों का उदाहरण देते हुए बताया कि 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने के बाद महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कुल 6486 निर्वाचित संचालकों में से लगभग 39 प्रतिशत यानी 2517 महिलाएं विजेता बनीं, जबकि 668 समितियों में से 281 की जिम्मेदारी महिलाओं के पास है।

राज्य में बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा, निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें और ड्रेस की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा, सभी स्कूलों और कॉलेजों में बालिका शौचालयों का निर्माण पूरा किया जा चुका है।

प्रदेश में 39 कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास संचालित हो रहे हैं, जहां लड़कियों को मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। साथ ही सुरक्षा, परिवहन, काउंसलिंग और सह-शैक्षिक गतिविधियों के जरिए बालिकाओं के समग्र विकास पर जोर दिया जा रहा है। इन प्रयासों का असर भी दिख रहा है—उच्च शिक्षा में बालिकाओं का ड्रॉपआउट 12 प्रतिशत कम हुआ है और सकल नामांकन अनुपात बढ़कर 48 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार विद्या ज्योति छात्रवृत्ति और गौरा देवी कन्या धन योजना जैसी योजनाएं चला रही है। इसके अलावा, तीन विश्वविद्यालयों में महिला कुलपतियों की नियुक्ति कर नेतृत्व के स्तर पर भी महिलाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।

कुल मिलाकर, राज्य सरकार शिक्षा से लेकर प्रशासन तक महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, और छात्र संघ चुनाव में 50% प्रतिनिधित्व की घोषणा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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