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    Home»उत्तराखंड»उत्तराखंड में महंगी सरकारी किताबों पर विवाद, NCERT से 80% तक ज्यादा कीमत
    उत्तराखंड

    उत्तराखंड में महंगी सरकारी किताबों पर विवाद, NCERT से 80% तक ज्यादा कीमत

    adminBy adminApril 9, 2026No Comments2 Mins Read
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    उत्तराखंड में महंगी सरकारी किताबों पर विवाद, NCERT से 80% तक ज्यादा कीमत
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    उत्तराखंड में स्कूली किताबों की कीमतों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जहां NCERT की किताबें कम कीमत पर उपलब्ध हैं, वहीं राज्य शिक्षा विभाग द्वारा प्रकाशित किताबें 80 फीसदी तक महंगी बताई जा रही हैं।

    जांच में सामने आया है कि कई मामलों में कंटेंट लगभग समान होने के बावजूद किताबों की कीमतों में भारी अंतर है। उदाहरण के तौर पर कक्षा 1 की अंग्रेजी की किताब ‘मृदंग’ NCERT द्वारा ₹65 में उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग की उसी पेज संख्या वाली किताब ₹100 में बेची जा रही है। वहीं कक्षा 6 की विज्ञान की किताब की कीमत ₹118 तक पहुंच रही है।

    अभिभावकों का कहना है कि जब बाजार में NCERT की किताबें आसानी से मिल रही हैं, तो फिर राज्य सरकार की ओर से महंगी किताबें क्यों लाई जा रही हैं। कुछ अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया है कि स्कूलों पर राज्य की किताबें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे उनका खर्च बढ़ रहा है।

    इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा जब अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने बाजार में उपलब्ध किताबों के दाम, पेज संख्या और पाठ्यक्रम की पड़ताल की। रिपोर्ट में पाया गया कि कई किताबों में केवल कवर बदला गया है, जबकि अंदर का कंटेंट NCERT से ही लिया गया है।

    मामला सामने आने के बाद अब प्रशासन भी हरकत में आ गया है। महानिदेशक दीप्ति सिंह ने कहा है कि इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। इसके तहत संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि आखिर किन कारणों से राज्य की किताबों की कीमतें अधिक तय की गईं।

    वहीं शिक्षा विभाग का तर्क है कि NCERT की ओर से पर्याप्त किताबें उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं, जिसके चलते राज्य को टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से अपनी किताबें छापनी पड़ीं। विभाग के अनुसार कागज की गुणवत्ता, छपाई लागत और रॉयल्टी भुगतान के कारण कीमतों में अंतर आया है।

     

    इसके बावजूद अभिभावकों में नाराज़गी बनी हुई है। उनका कहना है कि समान पाठ्यक्रम होने के बावजूद महंगी किताबें खरीदना उनके लिए आर्थिक बोझ बनता जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।

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