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    Home»उत्तराखंड»धर्म संसद में मुसलमानों के खिलाफ हेट स्पीच? वीडियो सामने आने पर खड़ा हुआ विवाद
    उत्तराखंड

    धर्म संसद में मुसलमानों के खिलाफ हेट स्पीच? वीडियो सामने आने पर खड़ा हुआ विवाद

    adminBy adminDecember 24, 2021No Comments2 Mins Read
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    धर्म संसद में मुसलमानों के खिलाफ हेट स्पीच? वीडियो सामने आने पर खड़ा हुआ विवाद
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    हरिद्वार के खड़खड़ी स्थित वेद निकेतन आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय धर्म संसद में दिए गए भड़काऊ भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। इसके बाद उत्तराखंड पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जितेन्द्र नारायण सिंह त्यागी (वसीम रिजवी) समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ धारा 153ए में मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ज्वालापुर के रहने वाले गुलबहार खान की ओर से धर्म संसद को लेकर हरिद्वार कोतवाली में एक तहरीर गई दी है। जिसमें वसीम रिजवी के भड़काऊ भाषण देने और कथित तौर पर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है।

    हरिद्वार में तीन दिनों तक चली धर्म संसद में कथित तौर पर मुसलमानों के खिलाफ नफरत भरे भाषण दिए गए और हिंसा का समर्थन किया गया। गुरुवार को सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। इस धर्म संसद का आयोजन 17 से 19 दिसंबर के बीच किया गया था, जिसमें कई संतों के अलावा बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय भी शामिल हुए थे। वीडियो वायरल होने के बाद आरटीआई कार्यकर्ता और तृणमूल कांग्रेस साकेत गोखले ने ट्वीट करके बताया कि उन्होंने ज्वालापुर पुलिस स्टेशन में एसएचओ को शिकायत दी है।

    उन्होंने लिखा, ”24 घंटे में आयोजकों और वक्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज न करने पर न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष वाद किया जाएगा।” इस सम्मेलन का आयोजन यति नरसिंहानंद की ओर से किया गया था। इसमें हिंदू रक्षा सेना के अध्यक्ष स्वामी प्रमोदानंद गिरी, स्वामी आनंदस्वरूप, साध्वी अन्नपूर्णा आदि वक्ता के रूप में शामिल हुए। आखिरी दिन बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय भी पहुंचे थे। हालांकि, उन्होंने इससे अपने आप को अलग करते हुए कहा कि वह केवल 30 मिनट वहां रुके थे और उन्हें नहीं पता कि यहां क्या कहा गया। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शमा मोहम्मद ने ट्वीट किया, ”मुनव्वर फारूकी को लगातार उन जोक्स के लिए दंडित किया गया, जो उन्होंने सुनाए भी नहीं थे, लेकिन धर्म संसद के उन सदस्यों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिन्होंने हरिद्वार में मुसलमानों के नरसंहार की अपील की। क्या भारत में अभी भी लोकतंत्र है।”

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