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    Home»Uncategorized»अगस्त्यमुनि दिवारा यात्रा: प्रशासन की जिद्द ने रोकी डोली, आस्था को टकराव में झोंक दिया: त्रिभुवन चौहान
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    अगस्त्यमुनि दिवारा यात्रा: प्रशासन की जिद्द ने रोकी डोली, आस्था को टकराव में झोंक दिया: त्रिभुवन चौहान

    adminBy adminJanuary 16, 2026No Comments2 Mins Read
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    अगस्त्यमुनि दिवारा यात्रा: प्रशासन की जिद्द ने रोकी डोली, आस्था को टकराव में झोंक दिया: त्रिभुवन चौहान
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    करीब 15 वर्षों बाद दिवारा यात्रा पर निकली ऋषि अगस्त्य मुनि महाराज की डोली के दूसरे दिन भी अगस्त्यमुनि क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने रहे। बृहस्पतिवार को डोली जब पुनः क्षेत्र भ्रमण पर निकली तो मैदान स्थित गद्दीस्थल के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही उसे रोक दिया गया। प्रशासन द्वारा लगाए गए गेट के कारण डोली अंदर प्रवेश नहीं कर सकी, जिससे श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश फैल गया।

    भक्तों का कहना था कि यह मार्ग सदियों से डोली यात्रा का पारंपरिक रास्ता रहा है, लेकिन प्रशासन ने बिना जनभावनाओं को समझे यहां निर्माण करा दिया। बीते दिन भी इसी कारण डोली को लौटना पड़ा था। बार-बार प्रशासन और जिलाधिकारी से गेट हटाने की मांग की गई, लेकिन कथित हठधर्मिता और अनदेखी के चलते कोई निर्णय नहीं लिया गया।

    स्थिति तब विस्फोटक हो गई जब आक्रोशित श्रद्धालुओं ने स्वयं ड्रिल मशीन और हथौड़ों से गेट को तोड़ना शुरू कर दिया। लगभग पांच घंटे की मशक्कत के बाद शाम करीब चार बजे गेट ध्वस्त हुआ, जिसके बाद डोली ने मैदान की परिक्रमा की और अपने गद्दीस्थल पर विराजमान हुई। वहां महाराज ने भक्तों का कुशलक्षेम जाना और बाद में मंदिर के लिए प्रस्थान किया।

    डोली के हाईवे पर रुकने से अगस्त्यमुनि बाजार और आसपास के इलाकों में करीब पांच घंटे लंबा जाम लगा रहा। केदारनाथ और रुद्रप्रयाग जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। जाम में एंबुलेंस तक फंसी रहीं, जिससे प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए। यातायात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा।

    इसी बीच नगर क्षेत्र में दिनभर बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित रही। व्यापार, ऑनलाइन कार्य और छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई। होटल व्यवसायियों और स्थानीय लोगों को वैकल्पिक स्रोतों से पानी जुटाना पड़ा। देर शाम बिजली तो बहाल हुई, लेकिन पानी की समस्या बनी रही।

    घटना के बाद प्रशासन ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 52 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, जिससे भक्तों में और रोष फैल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन धार्मिक भावनाओं का सम्मान करता, तो न जाम लगता, न टकराव होता।

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