Saturday, February 14

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या को बढ़ाए जाने के मामले को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की थी। इस दौरान महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर और मुख्य स्थायी अधिवक्ता (सीएससी) चन्द्रशेखर रावत ने मुख्य न्यायधीश की अध्यक्षता वाली खण्डपीठ के समक्ष मामले की जल्द सुनवाई के लिए प्रार्थना पत्र दिया। कोर्ट ने उनके पक्ष को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई मंगलवार पांच अक्तूबर के लिए नियत की है। सरकार ने इस मामले में कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए निर्णय को संशोधन करने की मांग की है।

उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद खुली चारधाम यात्रा से यात्रा से जुड़े व्यवसायियों ही नहीं बल्कि तीर्थयात्रियों में भी कुछ समय पहले जो खुशी की लहर थी, वो अब फिकी पड़ती दिखाई दे रही है। बाबा केदार के दर्शनों की उम्मीदों के साथ चारधाम यात्रा पर आए रहे यात्री रोते बिलखते आंखों में आंसुओं का सैलाब के विडियो आजकल लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। दरअसल बिना ई-पास यात्रा पर आए इस यात्री की तरह ही सैकड़ों यात्रियों के हालात हैं, जो धाम पहुंच बाबा के दर्शनों के लिए बीते कई दिनों से पहाड़ों की सड़कों में भूखे प्यासे भटक रहे हैं।

अब सरकार ने चारधाम यात्रा में तीर्थयात्रियों की निर्धारित संख्या बढ़ाने के लिए हलफनामे के साथ प्रार्थनापत्र दाखिल किया था। पूर्व में हाईकोर्ट ने सरकार की अर्जी पर सुनवाई करते हुए चारधाम यात्रा पर लगाई गई रोक को हटा दिया था। साथ ही केदारनाथ धाम में प्रतिदिन 800, बदरीनाथ में 1000, गंगोत्री में 600 और यमुनोत्री में 400 श्रद्धालुओं को जाने देने की अनुमति दी थी। बीते बृहस्पतिवार को सरकार की ओर से इस आशय का हलफनामा दाखिल कर दिया गया। सरकार के अनुसार चारों धामों में एसओपी का पूरी तरह अनुपालन किया जा रहा है। लेकिन बेहद कम तीर्थयात्री दर्शन के लिए जा पा रहे हैं।

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