आतंकी गतिविधियों के खिलाफ बड़ा कानूनी कदम
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों और कानूनी व्यवस्था ने आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कुख्यात कमांडर सैफुल्ला के खिलाफ अब गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी किया गया है। सैफुल्ला का नाम घाटी में हुई कई बड़ी और घातक आतंकी घटनाओं में प्रमुखता से आया है, जिनमें पहलगाम में हुआ हमला भी शामिल है। सुरक्षा बलों के लिए वह लंबे समय से एक बड़ा लक्ष्य बना हुआ है।
दो दशकों से सक्रिय है आतंकी नेटवर्क का मुख्य चेहरा
जांच रिपोर्टों के अनुसार, सैफुल्ला मूल रूप से पाकिस्तान के कसूर जिले के चंगा मांगा गांव का रहने वाला है। वह आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए अपनी पहचान छुपाने में माहिर है और नेटवर्क में कई अलग-अलग नामों का इस्तेमाल करता है। उसे साजिद जट्ट, अली भाई, हबीबुल्लाह मलिक, लंगड़ा, नूमी, नुमान, उस्मान हबीब और शानी जैसे विभिन्न उपनामों से जाना जाता है। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि वह पिछले 20 से अधिक वर्षों से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय है और घाटी में अस्थिरता पैदा करने की साजिशों में लिप्त रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी सतर्कता
सैफुल्ला के खिलाफ वारंट जारी होने के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है। इंटेलिजेंस नेटवर्क को और अधिक सक्रिय कर दिया गया है ताकि उसके संभावित ठिकानों और सहयोगियों का पता लगाया जा सके। घाटी में शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन का लक्ष्य ऐसे आतंकियों के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है। इस कानूनी कार्रवाई के बाद अब सैफुल्ला के खिलाफ शिकंजा और अधिक कसता नजर आ रहा है।


