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    Home»राष्ट्रीय»भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स पिछले छह महीनों से अंतरिक्ष में फंसी
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    भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स पिछले छह महीनों से अंतरिक्ष में फंसी

    Amit ThapliyalBy Amit ThapliyalNovember 15, 2024No Comments2 Mins Read
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      वजन में कमी और शारीरिक बदलावों का सामना कर रहीं

    भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स को लेकर एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। सुनीता विलियम्स पिछले छह महीनों से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर रह रही हैं, और इस दौरान उनके शरीर में कुछ बदलाव आए हैं, जिनमें वजन कम होना भी शामिल है। दरअसल, अंतरिक्ष में यात्रियों को कई शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें हड्डियों का कमजोर होना और भूख की कमी के कारण वजन घटने जैसी समस्याएं भी शामिल हैं।

    स्पेस में क्यों घटता है वजन?
    अंतरिक्ष यात्रियों को सबसे आम समस्या वजन में कमी की होती है। स्पेस मोशन सिकनेस और भूख में कमी के कारण उनका वजन लगातार कम होता जाता है। स्पेस स्टेशन में गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी) की कमी होने से भोजन की सुगंध नाक तक नहीं पहुंचती, जिससे उनका खाने का मन नहीं करता। ऐसे में संतुलित और पौष्टिक आहार ही उन्हें वजन कम करने से बचा सकता है।

    हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ता है असर
    अंतरिक्ष में रहने से हड्डियां और मांसपेशियां भी कमजोर हो जाती हैं, क्योंकि ग्रैविटी के अभाव में शरीर को अपने वजन का भार उठाने की जरूरत नहीं होती। लंबे समय तक स्पेस में रहने वाले यात्रियों की हड्डियां तेजी से कमजोर होती हैं, इसलिए उन्हें रोजाना लगभग 2 घंटे की कसरत करनी पड़ती है।

    नासा के अध्ययन के अनुसार शरीर में बदलाव
    नासा के अनुसार, ISS पर आधे से अधिक यात्रियों के शरीर में बदलाव होता है। गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण शरीर में मौजूद तरल ऊपर की ओर बढ़ता है, जिससे सिर का आकार बढ़ जाता है और चेहरे पर सूजन आ सकती है।

    अंतरिक्ष यात्री क्या खाते हैं?
    स्पेस स्टेशन पर अंतरिक्ष यात्रियों का भोजन विशेष डिस्पोजेबल पैकेज में आता है। इन पैकेजों में पौष्टिक विटामिन, खनिज और कैलोरी का संतुलन होता है। बिना ग्रैविटी के होने से नमक और काली मिर्च पाउडर तैर सकते हैं, इसलिए इन्हें तरल रूप में उपलब्ध कराया जाता है।

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