भारतीय व्यापार के लिए वैश्विक द्वार बनता सोहार पोर्ट
भारत के वैश्विक व्यापार विस्तार के लिए ओमान का सोहार पोर्ट एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। हाल ही में आयोजित एक प्रमोशनल इवेंट के दौरान ओमान के राजदूत ईसा सालेह अब्दुल्ला सालेह अलशिबानी ने स्पष्ट किया कि सोहार और ओमान के अन्य प्रमुख बंदरगाह, भारतीय मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार के लिए एक विशाल ‘गेटवे’ साबित होंगे। यह विकास न केवल मध्य-पूर्व (पश्चिम एशिया) बल्कि उससे भी आगे के विशाल क्षेत्रों के लिए भारतीय उत्पादों के लिए नए रास्ते खोलेगा। भारत और ओमान के बीच प्रस्तावित ‘कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ के मद्देनजर यह सहयोग दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकता है।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का मिलेगा बड़ा लाभ
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के डीजी और सीईओ डॉ. अजय सहाय ने सोहार पोर्ट की रणनीतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहाँ का ‘फ्री ट्रेड जोन’ (FTZ) भारतीय निवेशकों और निर्यातकों के लिए संभावनाओं का पिटारा है। उन्होंने बताया कि ओमान के अमेरिका, जीसीसी (GCC) और कई अफ्रीकी देशों के साथ पहले से ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) मौजूद हैं, जबकि भारत के इन देशों के साथ सीधे ऐसे समझौते नहीं हैं। ऐसे में, भारतीय कंपनियां अपने उत्पादों को सोहार पोर्ट पर ले जाकर वहां प्रोसेस कर सकती हैं और फिर ओमान के व्यापारिक समझौतों का लाभ उठाते हुए उन्हें अमेरिका, खाड़ी देशों और अफ्रीका के बाजारों में बेहद प्रतिस्पर्धी दरों पर निर्यात कर सकती हैं। इसके अलावा, सोहार के फ्री ट्रेड जोन में वेयरहाउसिंग की सुविधा भी व्यापारिक लागत को कम करने में मददगार साबित होगी।
लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी में बढ़ेगी मजबूती
सोहार पोर्ट की भौगोलिक स्थिति इसे अन्य विकल्पों जैसे दुक्म और सलालाह से अधिक उपयुक्त बनाती है। यह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित दूरी पर स्थित है, जिससे समुद्री मार्ग से जहाजों का आवागमन काफी सुगम और सुरक्षित रहता है। भविष्य की योजनाओं के तहत, सोहार पोर्ट को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रेल नेटवर्क से जोड़ने का काम भी शुरू होने वाला है, जिससे सीमा-पार माल ढुलाई (Cross-border freight) में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। सोहार फ्रीजोन के सीईओ और सोहार पोर्ट के डिप्टी सीईओ रेड अल रुबाई ने भी इस बात की पुष्टि की है कि ओमान के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय निवेश परिदृश्य में भारतीय कंपनियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारतीय व्यापार पहले से ही ओमान के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम का एक अहम हिस्सा बन चुका है।

