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    Home»उत्तराखंड»उत्तराखंड: खुद की जमीन पर बनवा सकेंगे हेलीपैड और हेलीपोर्ट, पढ़िए कैसे होगा ये साकार
    उत्तराखंड

    उत्तराखंड: खुद की जमीन पर बनवा सकेंगे हेलीपैड और हेलीपोर्ट, पढ़िए कैसे होगा ये साकार

    adminBy adminDecember 6, 2023No Comments3 Mins Read
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    उत्तराखंड: खुद की जमीन पर बनवा सकेंगे हेलीपैड और हेलीपोर्ट, पढ़िए कैसे होगा ये साकार
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    उत्तराखंड में अब आप अपनी खुद की जमीन पर हेलीपैड या हेलीपोर्ट बनवा सकते हैं, इससे आपको आर्थिक फायदा भी होगा। खुद की जमीन पर हेलीपैड और हेलीपोर्ट बनवाने के लिए दो तरीके हैं। पहले तरीके के अनुसार आप अपनी जमीन को लीज पर सरकार को दे सकते हैं और सरकार इस पर हेलीपैड और हेलीपोर्ट बनवाएगी। इसके बदले में सरकार आपको जमीन का किराया देगी, वहीं दूसरे तरीके के तहत आप खुद ही अपनी जमीन पर हेलीपैड और हेलीपोर्ट तैयार कर सकते हैं, इससे भी आपको आर्थिक फायदा होगा। दरअसल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अध्यक्षता में हुई उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में उत्तराखंड हेलीपैड और हेलीपोर्ट नीति 2023 को मंजूरी दे दी गई है, सरकार उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जगह-जगह पर हेलीपैड और हेलीपोर्ट का निर्माण करना चाहती है, कई जगहों पर सरकार को सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होती है इसके लिए यह नीति लाई गई है।

    इस नीति में दो विकल्प प्रस्तावित किये गये हैं जिनमें प्रथम विकल्प के अनुसार चयनित भूमि मालिक हैलीपैड / हैलीपोर्ट विकास के लिए प्राधिकरण को 15 साल के लिए पट्टे पर भूमि प्रदान कर सकते हैं जिस पर प्राधिकरण द्वारा चयनित भूमि पार्सल पर डीजीसीए नियमों द्वारा लागू डिजाइन और विशिष्टताओं के आधार पर हैलीपैड / हैलीपोर्ट को विकसित किया जायेगा। वित्तपोषण और विकास की लागत प्राधिकरण द्वारा वहन की जायेगी। आवेदक/भू-स्वामी को प्रतिवर्ष 100 रूपये प्रति वर्ग मी किराया भुगतान किया जायेगा एवं इसके अतिरिक्त, चयनित आवेदक/भू-स्वामी को निर्मित हैलीपैड / हैलीपोर्ट के संचालन एवं प्रबंधन से प्राप्त होने वाले राजस्व का 50 प्रतिशत भुगतान किया जायेगा। <strong>आगे पढ़ें:</strong>

    <strong>यह भी पढ़ें: <a href=”https://www.jantak.com/uttarakhand/haridwar-there-was-a-dispute-over-smoking-of-bhang-beedi-he-was-taken-to-the-field-and-then-beaten-to-death-with-sugarcane/”>हरिद्वार: भांग की बीड़ी पिलाने पर हुआ था विवाद, खेत में ले गया फिर गन्ने से पीट-पीटकर मार डाला</a></strong>

    दूसरे विकल्प के तहत चयनित आवेदक/भू-स्वामी द्वारा लागत में किसी भी वृद्धि सहित हेलीपैड / हेलीपोर्ट के वित्तपोषण और विकास की पूरी लागत का वहन किया जाएगा। हैलीपैड के लिए लगभग 10 से 20 लाख तथा हैलीपोर्ट के लिए लगभग 2 से 3 करोड़ की पूंजीगत आवश्यकता रहेगी। हैलीपैड / हैलीपोर्ट के विकास, संचालन एवं प्रबंधन (O&M) हेतु सभी प्रासंगिक अनुमोदन (डी०जी०सी०ए० लाईसेंस/संचालन अनुमति सहित) प्राप्त करने की जिम्मेदारी आवेदकों/भू-स्वामियों की होगी। प्राधिकरण प्रासंगिक अनुमोदन (डी०जी०सी०ए० लाईसेंस / संचालन अनुमति सहित) प्राप्त किये जाने हेतु सहायता करेगा। चयनित आवेदक/भू-स्वामी द्वारा भूमि पार्सल को, प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराये गये डिजाइन और विशिष्टताओं के अनुरूप, हैलीपैड / हैलीपोर्टस के रूप में विकसित किया जायेगा। डी०जी०सी०ए० लाईसेंस/अनुमोदन की वैधता की अवधि के दौरान, आवेदक/भू-स्वामी हैलीपैड / हैलीपोर्ट उपयोगकर्ताओं से सभी राजस्व एकत्र करेंगे। वाणिज्यिक संचालन तिथि से न्यूनतम 10 साल तक, प्राधिकरण सम्बन्धित हैलीपैड/हैलीपोर्ट के लिए, पात्र पूंजीगत सम्पत्ति (Eligible Capital Assets) के विकास पर होने वाले वास्तविक पूंजी व्यय या यूकाडा द्वारा उपलब्ध कराये गये पूंजीगत व्यय (CAPEX) का आंकलन, इनमें से जो भी कम हो के 50 प्रतिशत के बराबर पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करेगा। पूंजीगत सब्सिडी का भुगतान दो बराबर किश्तों में किया जायेगा।

    दोनों ही विकल्पों पर आवेदक/भू-स्वामी हेतु प्रस्तावित नीति में निर्धारित सभी मानकों/शर्तों तथा हैलीपैड हेतु न्यूनतम 1000 वर्ग मी० समतल भूमि क्षेत्र (30X30 मी०) एवं मू-क्षेत्र तथा हैलीपोर्ट हेतु न्यूनतम 4,000 वर्ग मीटर समतल भूमि क्षेत्र (प्रत्येक तरफ लगभग 50 मीटर) या जैसा प्राधिकरण द्वारा निर्दिष्ट की जायें, को पूरा किया जाना होगा।

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