देहरादून में वायु प्रदूषण ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पहली बार ऐसा हुआ है जब शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार 12 घंटे से अधिक समय तक 300 के पार दर्ज किया गया। मंगलवार आधी रात को एक्यूआई अधिकतम 385 तक पहुंच गया, जबकि औसत एक्यूआई 318 रिकॉर्ड किया गया। यह सामान्य दिनों में देहरादून का अब तक का सबसे अधिक औसत एक्यूआई माना जा रहा है, जो “बेहद खराब” श्रेणी में आता है।
पिछले कुछ दिनों से नए साल के जश्न के चलते देहरादून में पर्यटकों की आवाजाही में भारी इजाफा हुआ है। बड़ी संख्या में लोग पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे शहर में वाहनों का दबाव बढ़ गया है। इसके साथ ही जगह-जगह बोनफायर जलाए जा रहे हैं, जिससे वातावरण में धुआं और प्रदूषक कण तेजी से बढ़े हैं। वहीं, लंबे समय से बारिश न होने और हवा की गति बेहद कम रहने के कारण प्रदूषण फैल नहीं पा रहा है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।
दून विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष (एचओडी) डॉ. विजय श्रीधर के अनुसार ठंड के मौसम में हवा की रफ्तार कम हो जाती है और वातावरण में स्थिरता बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में वाहनों, बोनफायर और अन्य स्रोतों से निकलने वाला धुआं ऊपर की ओर नहीं जा पाता और निचली सतह पर ही जमा हो जाता है। इसके कारण पीएम-10 और पीएम-2.5 जैसे सूक्ष्म प्रदूषित कणों का घनत्व काफी बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर एक्यूआई को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही बारिश नहीं हुई या तेज हवाएं नहीं चलीं, तो वायु गुणवत्ता में सुधार की संभावना कम है। लगातार बढ़ता प्रदूषण बुजुर्गों, बच्चों और सांस संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने, मास्क का उपयोग करने और अनावश्यक वाहन प्रयोग कम करने की सलाह दी है। देहरादून जैसे शांत और प्राकृतिक शहर में इस स्तर का प्रदूषण प्रशासन और आम जनता दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

