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    Home»उत्तराखंड»संसद में गूंजा आयुर्वेद–योग का मुद्दा, डॉ. नरेश बंसल ने बजट बढ़ाने की रखी मांग
    उत्तराखंड

    संसद में गूंजा आयुर्वेद–योग का मुद्दा, डॉ. नरेश बंसल ने बजट बढ़ाने की रखी मांग

    Amit ThapliyalBy Amit ThapliyalDecember 4, 2025No Comments2 Mins Read
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    देहरादून/नई दिल्ली – भाजपा राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष व सांसद राज्यसभा डा. नरेश बंसल ने संसद मे आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा संर्वधन का विषय उठाया।डा. नरेश बंसल ने विषेश उल्लेख मे यह जनहित एवं देशहित का विषय उठाया।

    डा नरेश बंसल ने सदन मे कहा कि मैं आपका ध्यान भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। हमारे देश की आयुष सिस्टम से जुड़ी स्वदेशी स्वास्थ्य पद्धतियाँ – आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा – केवल इलाज नहीं, बल्कि रोगों की रोकथाम पर भी प्रभावशाली हैं।

    यह पद्धतियाँ हमारे देश के यशस्वी प्रधान सेवक  नरेंद्र मोदी जी के हृदय के भी अत्यंत निकट हैं। इसके बावजूद भी, इन्हें आज भी विदेशी चिकित्सा प्रणाली के समान दर्जा और संसाधन नहीं मिलते।

    उदाहरण के लिए, भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय का बजट ₹1,00,000 करोड़ है, जबकि आयुष मंत्रालय का बजट मात्र ₹4,000 करोड़ के आसपास है। यह भारी अंतर आयुर्वेद और अन्य पद्धतियों के विकास में बाधा है।

    डा. नरेश बंसल ने कहा कि मैं इस सदन के माध्यम से सरकार से निम्नलिखित सात आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध करता हूँ:

    1. आयुष्मान भारत योजना में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को भी शामिल किया जाए।
    2. ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 और ड्रग एंड मैजिक एक्ट 1954 को निरस्त कर यूनिफॉर्म हेल्थकेयर कोड लागू किया जाए।
    3. आयुर्वेदिक उद्योग, स्टार्टअप्स और रिसर्च को विशेष सरकारी प्रोत्साहन मिले।
    4. आयुष पद्धतियों का बजट वर्तमान आवश्यकता के अनुसार कम से कम 5 गुना बढ़ाया जाए।
    5. सभी मेडिकल कोर्स का पहला वर्ष समान हो, जिससे सभी पद्धतियों का मूल ज्ञान छात्रों को मिले।
    6. आयुष डॉक्टरों को X-ray, MRI, सर्जरी व डिलीवरी की अनुमति दी जाए।
    7. कक्षा 10 तक आयुर्वेद व योग को अनिवार्य विषय बनाया जाए।

    डा. नरेश बंसल ने निवेदन किया कि माननीय अध्यक्ष महोदय, यह समय है कि हम अपनी महान भारत से जुड़ी स्वदेशी चिकित्सा विरासत को वह स्थान दें, जिसकी वह वास्तविक रूप से हकदार है।

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