Dainik UjalaDainik Ujala
    What's Hot

    देहरादून एयरपोर्ट पर समर शेड्यूल लागू, 34 फ्लाइट्स को मंजूरी, 12 शहरों के लिए डायरेक्ट उड़ानें शुरू

    March 29, 2026

    उत्तराखंड में बड़ा सियासी उलटफेर: 3 पूर्व विधायक समेत 6 नेता कांग्रेस में होंगे शामिल

    March 28, 2026

    देहरादून में कार में मिली मेडिकल छात्रा की लाश, HOD के खिलाफ FIR दर्ज

    March 27, 2026
    Facebook Twitter Instagram
    Sunday, March 29
    Facebook Twitter Instagram
    Dainik Ujala Dainik Ujala
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • बागेश्वर
      • चमोली
      • चम्पावत
      • देहरादून
      • हरिद्वार
      • नैनीताल
      • रुद्रप्रयाग
      • पौड़ी गढ़वाल
      • पिथौरागढ़
      • टिहरी गढ़वाल
      • उधम सिंह नगर
      • उत्तरकाशी
    • मनोरंजन
    • खेल
    • अन्य खबरें
    • संपर्क करें
    Dainik UjalaDainik Ujala
    Home»उत्तराखंड»इगास उत्सव: आज भी भैलो की परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के गांव 
    उत्तराखंड

    इगास उत्सव: आज भी भैलो की परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के गांव 

    adminBy adminNovember 15, 2021No Comments3 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest WhatsApp LinkedIn Tumblr Email Telegram
    इगास उत्सव: आज भी भैलो की परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के गांव 
    Share
    Facebook WhatsApp Twitter Email LinkedIn Pinterest

    भैला ओ भैला, चल खेली औला, नाचा कूदा मारा फाल, फिर बौड़ी एगी बग्वाल … लोक गायक गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के इस गीत में गांवों में दीवाली और इगास उत्सव की महत्ता को बयां किया गया है। दीपावली के बाद इगास का त्योहार गांव-गांव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। घरों में विशेष साज-सज्जा के साथ तरह-तरह के पकवान तैयार किए जाते हैं। पारंपरिक भैलो नृत्य इस पर्व का खास आकर्षण होता है, जो आपसी सौहार्द और सहभागिता का संदेश देता है। रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के कई गांव भैलो नृत्य की परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं।

    दीपावली के ग्यारह दिन बाद इगास का पर्व
    कार्तिक मास में दीपावली के ग्यारह दिन बाद इगास का पर्व पर्वतीय अंचल में धूमधाम से मनाया जाता है। लोग अपने घरों को दीये की रोशनी से सरोबार करते हैं। घरों में तरह-तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं और देवी-देवताओं की विशेष पूजा की जाती है।

    देर शाम गांवों में पंचायती चौक या किसी अन्य सार्वजनिक स्थल पर महिला और युवक मंगल दल सहित अन्य ग्रामीण ढोल-दमाऊं की थाप पर भैलो नृत्य करते हैं। रुद्रप्रयाग जिले के रुद्रपुर, पट्टी बच्छणस्यूं के बणगांव, बणसो, संकरोड़ी, झुंडोली समेत रानीगढ़ पट्टी के कोट तल्ला, मल्ला, बिचला, जसोली, कोदिमा, तल्ला नागपुर के स्यूंड, सन-क्यार्क समेत जिले के कई अन्य गांवों में पुरुष और महिलाएं अलग-अलग समूह बनाकर भैलो खेलते हैं। इस दौरान चांछड़ी, झूमेलो व चौफला नृत्य के साथ पारंपरिक गीत भी गाए जाते हैं।

    अंधेरे से प्रकाश का प्रतीक
    चमोली जिले में बदरीनाथ धाम से संबंध रखने वाले डिम्मर गांव में भैलो का शुभारंभ पूजा-अर्चना के साथ पंचायत चौरी से होता है। आदिबदरी क्षेत्र सहित चांदपुर गढ़ी से लगे गांवों के साथ ही सिलपाटा और जुलगढ़ आदि गांवों में भी सदियों से भैलो खेलने की परंपरा निभाई जा रही है। लंबे समय से लोक संस्कृति के संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे दीपक बेंजवाल बताते हैं कि भैलो की परंपरा अंधेरे से प्रकाश का प्रतीक है। इन परंपराओं के संरक्षण के साथ इन्हें वृहद रूप देना होगा।
    क्या होता है भैलो 
    तिल, भंगजीरे, हिसर और चीड़ की सूखी लकड़ी के छोटे-छोटे गठ्ठर बनाकर इन्हें विशेष रस्सी से बांधकर भैलो तैयार किया जाता है। बग्वाल के दिन पूजा अर्चना कर भैलो का तिलक किया जाता है। फिर ग्रामीण एक स्थान पर एकत्रित होकर भैलो खेलते हैं। भैलो पर आग लगाकर इसे चारों ओर घुमाया जाता है। कई ग्रामीण भैलो से करतब भी दिखाते हैं।

    पारंपरिक भैलो गीत 
    पारंपरिक लोकनृत्य चांछड़ी और झुमेलों के साथ भैलो रे भैलो, काखड़ी को रैलू, उज्यालू आलो अंधेरो भगलू आदि लोकगीतों के साथ मांगल व देवी-देवताओं की जागर गाई जाती हैं।

    क्यों मनाई जाती है इगास  
    पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद जब अयोध्या लौटे थे, तो लोगों ने अपने घरों में दीये जलाकर उनका स्वागत किया था। लेकिन कहा जाता है कि तब गढ़वाल मंडल पर्वतीय क्षेत्रों में यह सूचना दीपावली के 11 दिन बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी को मिली, जिससे वहां दीपावली के 11 दिन बाद बूढ़ी दिवाली (इगास) धूमधाम से मनाई जाती है। इसी पर्व को लेकर एक अन्य मान्यता यह भी है कि वीर माधो सिंह भंडारी की सेना दुश्मनों को परास्त कर दीपावली के 11 दिन बाद जब वापस लौटी तो स्थानीय लोगों ने दीये जलाकर सैनिकों का स्वागत किया।

    Share. Facebook WhatsApp Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email Telegram
    admin
    • Website

    Related Posts

    देहरादून एयरपोर्ट पर समर शेड्यूल लागू, 34 फ्लाइट्स को मंजूरी, 12 शहरों के लिए डायरेक्ट उड़ानें शुरू

    March 29, 2026

    उत्तराखंड में बड़ा सियासी उलटफेर: 3 पूर्व विधायक समेत 6 नेता कांग्रेस में होंगे शामिल

    March 28, 2026

    देहरादून में कार में मिली मेडिकल छात्रा की लाश, HOD के खिलाफ FIR दर्ज

    March 27, 2026

    उत्तराखंड में बढ़ेगी महंगाई, 1 अप्रैल से बिजली-पानी के बिल 15% होंगे महंगे

    March 26, 2026
    Add A Comment

    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Dainik Ujala.
    • Home
    • Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Go to mobile version