Dainik UjalaDainik Ujala
    What's Hot

    देहरादून: बढ़ते अपराधों के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन आज, शहर में ट्रैफिक डायवर्जन लागू

    February 16, 2026

    कल महाशिवरात्रि पर केदारनाथ को मिलेगा 325वां रावल, शांतिलिंग होंगे उत्तराधिकारी

    February 14, 2026

    देहरादून में रिश्तों का कत्ल: अर्जुन केस में पैसों के लिए मां ने पार की इंसानियत की हद

    February 13, 2026
    Facebook Twitter Instagram
    Monday, February 16
    Facebook Twitter Instagram
    Dainik Ujala Dainik Ujala
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • बागेश्वर
      • चमोली
      • चम्पावत
      • देहरादून
      • हरिद्वार
      • नैनीताल
      • रुद्रप्रयाग
      • पौड़ी गढ़वाल
      • पिथौरागढ़
      • टिहरी गढ़वाल
      • उधम सिंह नगर
      • उत्तरकाशी
    • मनोरंजन
    • खेल
    • अन्य खबरें
    • संपर्क करें
    Dainik UjalaDainik Ujala
    Home»Uncategorized»हरिद्वार का वह घाट जहां भगवान राम ने किया था अपने पिता का पिंडदान, यहां तर्पण से पितरों को मिलता है मोक्ष
    Uncategorized

    हरिद्वार का वह घाट जहां भगवान राम ने किया था अपने पिता का पिंडदान, यहां तर्पण से पितरों को मिलता है मोक्ष

    adminBy adminSeptember 30, 2023No Comments3 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest WhatsApp LinkedIn Tumblr Email Telegram
    हरिद्वार का वह घाट जहां भगवान राम ने किया था अपने पिता का पिंडदान, यहां तर्पण से पितरों को मिलता है मोक्ष
    Share
    Facebook WhatsApp Twitter Email LinkedIn Pinterest

    उत्तराखंड की धर्म नगरी हरिद्वार विश्व में एक तीर्थ स्थल के नाम से विख्यात है. हरिद्वार को कुंभ नगरी के नाम से भी जाना जाता है. प्राचीन काल में देवताओं और असुरों के मध्य हुए समुद्र मंथन के बाद अमृत कलश निकला था, जिसके बाद अमृत के लिए असुरों और देवताओं में युद्ध हुआ था. इस दौरान अमृत कलश को लेकर जाते वक्त अमृत की कुछ बूंदें धरती पर चार जगह हरिद्वार, इलाहाबाद, नासिक और उज्जैन में छलक कर गिरी थी. हरिद्वार में हर की पौड़ी पर अमृत की बूंदें गिराने के कारण यहां हर 12 साल बाद महाकुंभ का आयोजन बहुत बड़े स्तर पर होता है. महाकुंभ में लाखों साधु-संत और देश-विदेश से लोग गंगा में डुबकी लगाने आते है. वहीं हरिद्वार के प्राचीन गंगा घाटों में से कुशावर्त घाट है, जहां पर पिंड दान करने, दसवां क्रिया करने की धार्मिक मान्यता बताई गई है.

    हरिद्वार के प्राचीन गंगा घाटों में कुशावर्त घाट का विशेष महत्व बताया गया है, जहां पर गंगा स्नान करने और अपने प्रियजनों, पित्रों के निमित कार्य करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति मिलने की धार्मिक मान्यता बताई गई है. कुशावर्त घाट पर मुख्य रूप से रोजाना देश के अलग-अलग प्रांतों से लोग यहां पिंड दान, तर्पण और अस्थियां प्रवाहित करने आते है. पुरोहित कन्हैया शर्मा बताते हैं कि कुशावर्त घाट देवों और पितरों को प्रसन्न करने का एक स्थान है. इस स्थान का वर्णन विष्णु पुराण, शिव पुराण और स्कंद पुराण के केदारखंड में किया गया है. धार्मिक मान्यता है कि इस स्थान पर प्राचीन काल में कुशा के बहुत से वृक्ष हुआ करते थे. त्रेता युग में भगवान राम ने अपने पिता और समस्त पूर्वजों के उद्धार हेतु यहां पर पिंडदान और तर्पण आदि किया था. द्वापर युग में पांडवों ने इसी स्थान पर पिंड दान आदि किए थे.

    बिहार के गया जी को सबसे बड़ा पितृ तीर्थ माना जाता है. गया में पितृ पक्ष के दिन पूर्ण गया जी करने से पितरों को प्रेत योनि से मुक्ति मिल कर मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसी के साथ ही हरि के द्वार हरिद्वार में कुशा घाट हरकी पौड़ी कनखल नारायणी शिला मंदिर की भी विशेष मान्यता है. नारायणी शिला मंदिर पर पिण्डदान और श्राद्ध कर्म करने से गया जी का पुण्य फल मिलता है. इसके अलावा हरिद्वार के इस मंदिर में श्राद्ध करने का अधिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि माना जाता है कि गया में श्राद्ध करने से तो मात्र पित्रों को मोक्ष मिलता है, मगर हरिद्वार में नारायणी शिला मंदिर में श्राद्ध करने से पित्रों को मोक्ष के साथ ही सुख-सम्पत्ति भी मिलती है.

    नारायणी शिला मंदिर के बारे में कहा जाता है कि एक बार जब गया सुर नाम का राक्षस देवलोक से भगवान विष्णु यानि नारायण का श्री विग्रह लेकर भागा तो भागते हुए नारायण के विग्रह का धड़ यानि मस्तक वाला हिस्सा श्री बद्रीनाथ धाम के बह्मकपाली नाम के स्थान पर गिरा, उनके ह्दय वाले कंठ से नाभि तक का हिस्सा हरिद्वार के नारायणी मंदिर में गिरा और चरण गया में गिरे. जहां नारायण के चरणों में गिरकर ही गयासुर की मौत हो गई यानि वही उसको मोक्ष प्राप्त हुआ था. स्कंध पुराण के केदार खण्ड के अनुसार हरिद्वार में नारायण का साक्षात ह्दय स्थान होने के कारण इसका महत्व अधिक इसलिए माना जाता है, क्योंकि मां लक्ष्मी उनके ह्दय में निवास करती है इसलिए इस स्थान पर श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व माना जाता है.

    devbhumi news devbhumi samachar pahad news pahad samachar uttarakhand news uttarakhand samachar उत्तराखंड न्यूज़ देवभूमि न्यूज़ देवभूमि समाचार पहाड़ न्यूज़. उत्तराखंड समाचार हरिद्वार पिंडदान
    Share. Facebook WhatsApp Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email Telegram
    admin
    • Website

    Related Posts

    देहरादून: बढ़ते अपराधों के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन आज, शहर में ट्रैफिक डायवर्जन लागू

    February 16, 2026

    कल महाशिवरात्रि पर केदारनाथ को मिलेगा 325वां रावल, शांतिलिंग होंगे उत्तराधिकारी

    February 14, 2026

    देहरादून में रिश्तों का कत्ल: अर्जुन केस में पैसों के लिए मां ने पार की इंसानियत की हद

    February 13, 2026

    सीएम धामी का कड़ा संदेश: अपराधियों पर तुरंत कार्रवाई करें, हर मामले में दर्ज हो मुकदमा

    February 12, 2026
    Add A Comment

    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Dainik Ujala.
    • Home
    • Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Go to mobile version