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    Home»राष्ट्रीय»सुरों में रची पहचान: नरेश कुमार ने ‘वंदे मातरम्’ को नया संगीत रूप दिया
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    सुरों में रची पहचान: नरेश कुमार ने ‘वंदे मातरम्’ को नया संगीत रूप दिया

    adminBy adminJanuary 31, 2026No Comments2 Mins Read
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    सुरों में रची पहचान: नरेश कुमार ने ‘वंदे मातरम्’ को नया संगीत रूप दिया
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    A-Grade कंपोज़र नरेश कुमार ने आकाशवाणी के विशेष कार्यक्रम ‘ स्वरांजलि भारत गौरव गान ’ में अपनी नई रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया। ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उन्होंने इसे एक नया संगीत रूप देकर देशभक्ति की भावना को आधुनिक सुरों में प्रस्तुत किया। यह प्रस्तुति गणतंत्र दिवस विशेष के अंतर्गत न केवल श्रोताओं को भावविभोर कर गई, बल्कि देशभक्ति के प्रतीक गीत को नए रंग में जीवंत करने का भी प्रयास थी।
    कार्यक्रम में उनके साथ काम करने वाले वादक और सहायक गायक एवं गायिकाएँ भी रचनाओं को और मधुर और प्रभावशाली बनाने में अहम भूमिका निभा रहे थे। उनकी सहभागिता ने हर धुन में उत्साह और ऊर्जा भर दी, जिससे ‘वंदे मातरम्’ का नया रूप और भी जीवंत बन गया।
    नरेश कुमार को व्यापक पहचान तब मिली जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 100वें एपिसोड का टाइटल ट्रैक तैयार किया। करोड़ों श्रोताओं तक पहुँचने वाले इस कार्यक्रम में उनका संगीत भावनात्मक गहराई और संतुलित प्रस्तुति के लिए सराहा गया।
    भारत की अध्यक्षता में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के दौरान ‘वसुधैव कुटुंबकम’ गीत के माध्यम से उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक एकता के संदेश को संगीत में साकार किया।

    फिल्मी और गैर-फिल्मी संगीत दोनों क्षेत्रों में सक्रिय नरेश कुमार ने उदित नारायण, कविता कृष्णमूर्ति, शान और जावेद अली जैसे वरिष्ठ गायकों के साथ कार्य किया है। उनकी रचनाओं की विशेषता शास्त्रीय आधार और आधुनिक प्रस्तुति के बीच संतुलन है।

    भक्ति संगीत के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने मनोज तिवारी के लिए राम भजनों की रचना की, वहीं शंकर साहनी के साथ मिलकर राम और कृष्ण भजनों को संगीतबद्ध किया। उनकी भक्ति रचनाएँ सरलता और भावात्मक गहराई के लिए जानी जाती हैं।

    तेजी से बदलते संगीत परिवेश में नरेश कुमार गुणवत्ता और संगीतात्मक अनुशासन को प्राथमिकता देते हैं। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ रेडियो, मंच और रिकॉर्डेड माध्यमों में समान रूप से स्वीकार की जाती हैं।
    नरेश कुमार केवल एक संगीतकार नहीं, बल्कि भारतीय संगीत परंपरा और आधुनिक अभिव्यक्ति के बीच एक सशक्त सेतु हैं।

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