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    Home»राष्ट्रीय»पंजाब में तबाही मचाती बाढ़, 1500 गांव प्रभावित – अमृतसर के सीमांत गांवों में बर्बादी का मंजर
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    पंजाब में तबाही मचाती बाढ़, 1500 गांव प्रभावित – अमृतसर के सीमांत गांवों में बर्बादी का मंजर

    Amit ThapliyalBy Amit ThapliyalSeptember 7, 2025No Comments2 Mins Read
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    अमृतसर: पंजाब इस समय इतिहास की सबसे भीषण बाढ़ त्रासदी का सामना कर रहा है। अमृतसर जिले के सीमांत गांव दंगई सहित अजनाला क्षेत्र के 45 से अधिक गांवों में चार फीट तक पानी भरा हुआ है। गांव की गलियों से लेकर घरों तक हर तरफ पानी फैला है। सैकड़ों एकड़ फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, कई मकान जर्जर होकर मलबे में तब्दील हो गए हैं और ग्रामीण राहत टेंटों में रहने को मजबूर हैं।

    गांव दंगई के निवासी दिलबाग सिंह, हरजोत सिंह, सुखदेव सिंह और सुखजीत ने बताया कि उनकी पूरी फसल डूब चुकी है। कारोबार भी चौपट हो गया है। पशुओं में बीमारियां फैल रही हैं और अस्थायी झोपड़े बारिश की मार नहीं सह पा रहे। गांव वालों का कहना है कि चोरी की घटनाओं के डर से वे दिन-रात बेचैनी में हैं।

    पूरे पंजाब में तबाही

    आपदा की इस घड़ी में अब तक 46 लोगों की जान जा चुकी है। 1.74 लाख हेक्टेयर फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। सभी 23 जिलों के लगभग 1500 गांव और करीब 3.87 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। हजारों परिवार बेघर हो गए हैं और लाखों पशुधन बह चुके हैं।

    नदियों का उफान और डैमों का दबाव

    रावी, व्यास और सतलुज जैसी नदियों के उफान ने पंजाब में कहर बरपाया है। सामान्य से अधिक बारिश के चलते भाखड़ा, रणजीत सागर, शाहपुरकंडी और पौंग डैम के गेट कई बार खोलने पड़े। इसका सीधा असर पंजाब के निचले इलाकों पर पड़ा। नदियों का जलस्तर बढ़ने से तटबंध कमजोर होकर टूट रहे हैं और पानी गांवों में घुस रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल 30 अगस्त तक ही 14.11 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो चुका था, जबकि 1988 में आई भीषण बाढ़ के दौरान यह स्तर 11.20 लाख क्यूसेक था।

    राहत कार्यों में जुटा प्रशासन

    अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, पठानकोट, गुरदासपुर, मोगा, फिरोजपुर, फाजिल्का और होशियारपुर जैसे जिलों में हालात गंभीर बने हुए हैं। डीसी साक्षी साहनी के नेतृत्व में सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीएसएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं। प्रभावितों तक दवाइयां, राशन, टेंट और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि मदद अभी भी पर्याप्त नहीं है और पानी घटने के बाद गांवों से मलबा हटाने में महीनों लगेंगे।

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