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    Home»उत्तराखंड»बदरीनाथ मंदिर दान घोटाला: क्या पहले भी हुई थी हेराफेरी? 40 दिन का रिकॉर्ड जांच के दायरे में
    उत्तराखंड

    बदरीनाथ मंदिर दान घोटाला: क्या पहले भी हुई थी हेराफेरी? 40 दिन का रिकॉर्ड जांच के दायरे में

    adminBy adminJuly 7, 2026No Comments3 Mins Read
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    बदरीनाथ मंदिर दान घोटाला: क्या पहले भी हुई थी हेराफेरी? 40 दिन का रिकॉर्ड जांच के दायरे में
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    बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं से प्राप्त दान और चढ़ावे की गणना बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से गठित टीम की निगरानी में की जाती है। इस वर्ष बनी टीम में आरोपी अधिकारी को भी शामिल किया गया था। इसी कारण जांच केवल दो जुलाई की घटना तक सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि पिछले कई दिनों की दान गणना प्रक्रिया की भी बारीकी से जांच की जा रही है।

    बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रांगड़ के अनुसार, चढ़ावे की गणना स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की लगभग 40 दिन की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी गई है। जांच टीम एक-एक फुटेज का परीक्षण कर रही है। यदि किसी अन्य दिन भी किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    जांच में आरोपी अधिकारी की नियुक्ति और जिम्मेदारियों को भी खंगाला जा रहा है। वर्ष 2003 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के रूप में अस्थायी नियुक्ति पाने वाले अधिकारी को वर्ष 2014 में स्थायी किया गया था। बाद में वर्ष 2017 में उसे बीकेटीसी अध्यक्ष का निजी सचिव बनाया गया। वर्ष 2026 में पहली बार उसकी बदरीनाथ मंदिर में तैनाती हुई, जहां उसे दान-चढ़ावे की गणना और प्रोटोकॉल नोडल अधिकारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इसी पहली तैनाती के दौरान उस पर चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी के आरोप लगे हैं।

    मामले में एक और पहलू भी जांच के केंद्र में है। दान गणना के लिए गठित छह सदस्यीय टीम के नोडल अधिकारी और सब-नोडल अधिकारी 30 जून को सेवानिवृत्त हो चुके थे, लेकिन उनकी जगह नए अधिकारियों की नियुक्ति नहीं की गई। ऐसे में दो जुलाई को हुई दान गणना के दौरान आरोपी अधिकारी की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    बीकेटीसी के अनुसार मंदिर में मिलने वाले प्रत्येक दान का रिकॉर्ड तय प्रक्रिया के तहत रखा जाता है। सबसे पहले सोना और चांदी अलग किए जाते हैं, फिर नकदी की गणना होती है। जरूरत पड़ने पर आभूषणों की जांच के लिए सोनार बुलाया जाता है। नकदी को खजांची की मौजूदगी में बैंक कर्मियों को सौंपकर उसकी रसीद ली जाती है, जबकि सोना-चांदी को अलग-अलग पोटलियों में सुरक्षित रखकर प्रत्येक पर तारीख और सामग्री का पूरा विवरण दर्ज किया जाता है।

    पूरी जांच में सीसीटीवी फुटेज को सबसे अहम सबूत माना जा रहा है। मंदिर परिसर में कुल 32 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एक कैमरे की रिकॉर्डिंग में आरोपी कर्मचारी मोबाइल फोन के साथ कुछ संदिग्ध वस्तु लेते हुए दिखाई दिया है। अब जांच टीम पुराने और नए दोनों कैमरों की रिकॉर्डिंग का मिलान कर रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि यह केवल एक दिन की घटना थी या इससे पहले भी इसी तरह की गतिविधियां होती रही थीं।

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