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    Home»Uncategorized»देहरादून में फर्जी दस्तावेज रैकेट का भंडाफोड़, बांग्लादेशी नागरिकों को बनाया जा रहा था भारतीय
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    देहरादून में फर्जी दस्तावेज रैकेट का भंडाफोड़, बांग्लादेशी नागरिकों को बनाया जा रहा था भारतीय

    adminBy adminJanuary 10, 2026No Comments2 Mins Read
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    देहरादून में फर्जी दस्तावेज रैकेट का भंडाफोड़, बांग्लादेशी नागरिकों को बनाया जा रहा था भारतीय
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    पटेलनगर में गुरुवार को फर्जी दस्तावेजों के साथ पकड़ी गई बांग्लादेशी नागरिक सुबेदा बेगम उर्फ प्रिया ने उत्तराखंड में सक्रिय एक बड़े फर्जीवाड़ा नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि देहरादून और रुड़की के दो कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) विदेशी नागरिकों को भारतीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा रहे थे।

    सुबेद़ा के पास से जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी जैसे कई दस्तावेज बरामद हुए, जो जांच में फर्जी पाए गए। पटेलनगर पुलिस ने शुक्रवार को देहरादून स्थित CSC संचालक फिरोज से लंबी पूछताछ की। उसने दावा किया कि दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भेजे गए थे और सत्यापन स्थानीय बीएलओ द्वारा किया गया था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उस समय किन बीएलओ की जिम्मेदारी थी।

    जांच आगे बढ़ने पर यह मामला पहले पकड़े जा चुके मामून हसन और बबली बेगम से जुड़ता नजर आया। मामून हसन, जो बांग्लादेश का निवासी था, देहरादून में सचिन चौहान के नाम से रहकर नौकरी कर रहा था, जबकि बबली बेगम भूमि शर्मा बनकर रह रही थी। दोनों के पास भी इसी तरह से बने फर्जी सरकारी दस्तावेज मिले थे।

    सुबेद़ा ने पूछताछ में रुड़की के CSC संचालक अजीत कुमार और देहरादून के फिरोज का नाम लिया है। पुलिस को शक है कि यह एक संगठित सिंडिकेट है, जिसमें कुछ स्थानीय स्तर के कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं, जो पते के सत्यापन और नाम परिवर्तन में मदद कर रहे हैं।

    एसएसपी अजय सिंह के अनुसार, सुबेद़ा के मोबाइल डेटा, बैंक खातों और बरामद बांग्लादेशी पहचान पत्रों की गहन जांच की जा रही है। रुड़की में फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। अब तक देहरादून में 20 बांग्लादेशी नागरिक पुलिस के रडार पर आ चुके हैं, जिनमें से 10 को डिपोर्ट किया जा चुका है और 10 आरोपियों को जेल भेजा गया है।

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