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    Home»उत्तराखंड»सुप्रीम कोर्ट ने बनभूलपुरा अतिक्रमण केस की सुनवाई 2 दिसंबर तक टाली
    उत्तराखंड

    सुप्रीम कोर्ट ने बनभूलपुरा अतिक्रमण केस की सुनवाई 2 दिसंबर तक टाली

    Amit ThapliyalBy Amit ThapliyalNovember 15, 2025No Comments2 Mins Read
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    नैनीताल। बहुचर्चित बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद अगली तारीख 2 दिसंबर तय कर दी है। अदालत ने हाईकोर्ट के हटाए जाने वाले आदेश पर लगी अंतरिम रोक को यथावत रखने का निर्देश दिया।

    जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बागची की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई की। यह याचिका अब्दुल मतीन सिद्दीकी द्वारा दायर लीव-टू-अपील से संबंधित है, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट की उस खंडपीठीय व्यवस्था को चुनौती दी है, जिसमें बनभूलपुरा क्षेत्र से रेलवे अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए गए थे।

    सुनवाई के दौरान रेलवे, राज्य सरकार और प्रभावित पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क रखे। रेलवे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ऐश्वार्या भाटी ने दलील देते हुए कहा कि रेल परियोजनाओं के विस्तार और निर्माण के लिए कुल 30 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इस भूमि पर मौजूद अतिक्रमण को हटाए बिना रेल सेवा विकास संभव नहीं है, इसलिए अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए।

    राज्य सरकार की तरफ से अधिवक्ता अभिषेक अत्रे ने पक्ष रखा। वहीं कब्जेदारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद, प्रशांत भूषण और अन्य वकीलों ने रेलवे के दावों पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जिस भूमि की मांग रेलवे अब कर रहा है, वह उसके पहले दिए गए लिखित दावे में शामिल नहीं थी। साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया कि निर्माणाधीन रिटेनिंग वॉल के बाद रेलवे के ढांचे को कोई खतरा नहीं बचता।

    कब्जेदारों की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विस्थापन के प्रस्ताव का भी विरोध किया गया। उनका कहना था कि बनभूलपुरा के निवासियों को जबरन हटाकर किसी अन्य स्थान पर बसाना अनुचित है। इस पर रेलवे के अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध जताया। अब अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को करेगी।

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