Dainik UjalaDainik Ujala
    What's Hot

    देहरादून: बढ़ते अपराधों के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन आज, शहर में ट्रैफिक डायवर्जन लागू

    February 16, 2026

    कल महाशिवरात्रि पर केदारनाथ को मिलेगा 325वां रावल, शांतिलिंग होंगे उत्तराधिकारी

    February 14, 2026

    देहरादून में रिश्तों का कत्ल: अर्जुन केस में पैसों के लिए मां ने पार की इंसानियत की हद

    February 13, 2026
    Facebook Twitter Instagram
    Monday, February 16
    Facebook Twitter Instagram
    Dainik Ujala Dainik Ujala
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • बागेश्वर
      • चमोली
      • चम्पावत
      • देहरादून
      • हरिद्वार
      • नैनीताल
      • रुद्रप्रयाग
      • पौड़ी गढ़वाल
      • पिथौरागढ़
      • टिहरी गढ़वाल
      • उधम सिंह नगर
      • उत्तरकाशी
    • मनोरंजन
    • खेल
    • अन्य खबरें
    • संपर्क करें
    Dainik UjalaDainik Ujala
    Home»उत्तराखंड»भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं से निपटने के लिए उत्तराखंड के चार जिलों में लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम
    उत्तराखंड

    भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं से निपटने के लिए उत्तराखंड के चार जिलों में लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम

    Amit ThapliyalBy Amit ThapliyalAugust 30, 2025No Comments2 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest WhatsApp LinkedIn Tumblr Email Telegram
    Share
    Facebook WhatsApp Twitter Email LinkedIn Pinterest

    जीएसआई ने शुरू किया परीक्षण, समय रहते मिलेगी चेतावनी

    देहरादून। उत्तराखंड में भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं से निपटने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) जल्द ही चार जिलों में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की तैयारी कर रहा है। वर्तमान में इस सिस्टम का परीक्षण चल रहा है और सफलता मिलने के बाद इसे उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी जिलों में स्थापित किया जाएगा। इससे समय रहते चेतावनी जारी की जा सकेगी और जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

    जीएसआई देहरादून के निदेशक रवि नेगी ने बताया कि यह तकनीक भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाएगी। वहीं, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि अर्ली वार्निंग सिस्टम से न केवल पूर्वानुमान और सुरक्षा उपाय मजबूत होंगे, बल्कि स्थानीय लोगों को भी समय रहते सतर्क किया जा सकेगा।

    सचिव सुमन ने भूस्खलन आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर आयोजित कार्यशाला में कहा कि शोध संस्थानों द्वारा किए गए अध्ययनों को सरल भाषा में साझा किया जाना चाहिए ताकि विभाग आम जनता को जागरूक कर सके। उन्होंने जोर दिया कि पूर्वानुमान जारी करने के बाद इतना समय जरूर मिलना चाहिए कि लोग सुरक्षा के कदम उठा सकें।

    कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि राज्य में अधिकांश भूस्खलन बारिश के दौरान होते हैं और चमोली जिला सबसे अधिक प्रभावित है। आईआईआरएस के वैज्ञानिक डॉ. सोवन लाल ने कहा कि उपग्रह और ड्रोन तकनीक से संवेदनशील इलाकों की निगरानी और अध्ययन किया जा सकता है।

    जीएसआई उप महानिदेशक संजीव कुमार और डॉ. हरीश बहुगुणा ने बताया कि रियल-टाइम डेटा मिलने पर अर्ली वार्निंग सिस्टम के नतीजे और बेहतर होते हैं। साथ ही, राज्य में कितने ऑल वेदर स्टेशन की जरूरत है, इस पर भी चर्चा की गई।

    कार्यशाला में जीएसआई और आपदा प्रबंधन विभाग के बीच एक एमओयू भी साइन हुआ, जिससे शोध और सूचनाओं का आदान-प्रदान और अधिक सहज हो सकेगा। इस अवसर पर वाडिया संस्थान, सीबीआरआई सहित 28 संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

    Share. Facebook WhatsApp Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email Telegram
    Avatar photo
    Amit Thapliyal

    Related Posts

    एमडीडीए की सख़्त कार्रवाई- अवैध प्लॉटिंग पर चला बुलडोज़र, 10 बीघा क्षेत्र में ध्वस्तीकरण

    February 9, 2026

    विकासनगर में दर्दनाक हादसा, हिमाचल रोडवेज की बस गहरी खाई में गिरी, तीन की मौत

    February 3, 2026

    धामी कैबिनेट के बड़े फैसले: स्वास्थ्य कर्मियों के तबादले से लेकर ग्रीन हाइड्रोजन नीति तक लगी मुहर

    January 28, 2026

    उच्च शिक्षा विभाग में 268 असिस्टेंट प्रोफेसर के स्थायीकरण को सरकार की मंजूरी

    January 15, 2026
    Add A Comment

    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Dainik Ujala.
    • Home
    • Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Go to mobile version