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    युवाओं में बेरोजगारी की दर अधिक

    Amit ThapliyalBy Amit ThapliyalDecember 9, 2024No Comments5 Mins Read
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    प्रह्लाद सबनानी
    प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति की सदस्य शमिका रवि के हालिया रिसर्च पेपर में कई महत्त्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं। भारत के आर्थिक विकास के कई क्षेत्रों के संबंध में तथ्यों पर आधारित सारगॢभत बातें बताने के साथ-साथ यह भी जानकारी दी गई है कि किस प्रकार भारत में अब ग्रामीण इलाके भी अर्थव्यवस्था में अपना योगदान बढ़ा रहे हैं। यह भी कि किस प्रकार भारत में तेज गति से हो रहे आर्थिक विकास का लाभ देश के युवाओं को रोजगार के अधिक अवसरों के रूप में मिल रहा है। किसी भी देश के लिए श्रम की भागीदारी एवं बेरोजगारी, दो अलग-अलग मुद्दे हैं।

    श्रम की भागीदारी में 18-59 वर्ष के बीच के वे लोग शामिल रहते हैं, जो अर्थ के अर्जन हेतु या तो कुछ कार्य कर रहे हैं अथवा कोई आर्थिक कार्य करने को उत्सुक हैं एवं इस हेतु रोजगार तलाश रहे हैं। पिछले 40 वर्षो के दौरान चीन में श्रम की औसत भागीदारी 75 प्रतिशत से ऊपर रही है अर्थात प्रत्येक 4 में से 3 लोग या तो रोजगार में रहे हैं अथवा रोजगार तलाशते रहे हैं। वियतनाम में श्रम की भागीदारी 72-73 प्रतिशत के बीच रही है। बांग्लादेश में यह 60 प्रतिशत से अधिक रही है परंतु भारत में 5 वर्ष पूर्व तक केवल 50 प्रतिशत के आसपास थी जो आज बढक़र 57 प्रतिशत हो गई है। अर्थात इतने बड़े देश में कुल कार्य करने योग्य जनसंख्या में से आधे से कुछ कम आबादी या तो रोजगार में नहीं है अथवा रोजगार तलाश भी नहीं रही है। यह स्थिति भारत जैसे देश के लिए ठीक नहीं है। दूसरे, बेरोजगारी से आश्य ऐसे नागरिकों से है, जो रोजगार तलाश रहे हैं, लेकिन रोजगार मिल नहीं रहा। भारत में ऐसे नागरिकों की संख्या मात्र 3 प्रतिशत है।

    समय के साथ बेरोजगारी की दर में थोड़ा-बहुत परिवर्तन होता रहता है परंतु, जब इस स्थिति को विभिन्न प्रदेशों के बीच तुलना करते हुए देखते हैं, तो बेरोजगारी की दर में भारी अंतर दिखाई देता है। गुजरात, छत्तीसगढ़, कर्नाटक जैसे राज्यों में बेरोजगारी की दर 0.9-1.5 प्रतिशत के बीच है, जबकि केरल में 12.5 प्रतिशत है। आर्थिक विकास में वृद्धि के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी अधिक निर्मिंत होते हैं। इसलिए देश में रोजगार के नये अवसर निर्मिंत करने के लिए व्यवसाय को बढ़ाना होगा, विकास को बढ़ाना होगा। केवल केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारें समस्त नागरिकों को रोजगार उपलब्ध नहीं करा सकतीं। इस हेतु, निजी क्षेत्र को आगे आना होगा। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के संस्थानों के रोजगार के अवसर निर्मिंत करने की कुछ सीमाएं हैं।

    आज भारत में 30 वर्ष के अंदर की उम्र के नागरिकों में बेरोजगारी की दर 12 प्रतिशत है, जबकि देश में कुल बेरोजगारी की दर 3.1 प्रतिशत है। अत: युवाओं में बेरोजगारी की दर अधिक दिखाई देती है। युवाओं में कौशल का अभाव है। इसलिए केंद्र सरकार विशेष कार्यक्रम लागू कर युवाओं में कौशल विकसित का प्रयास कर रही है। विशेष रूप से युवाओं के लिए कहा जा रहा है कि वे 30 वर्ष की उम्र तक काम करना ही नहीं चाहते क्योंकि इस उम्र तक वे रोजगार के अच्छे अवसर ही तलाशते रहते हैं। 30 वर्ष की उम्र के बाद वे दबाव में आने लगते हैं एवं फिर जो भी रोजगार अवसर मिलता है, उसे स्वीकार कर लेते हैं।

    इसलिए 30 वर्ष से अधिक की उम्र के नागरिकों के बीच बेरोजगारी की दर बहुत कम है। यह स्थिति हाल के समय में अन्य देशों में भी देखी जा रही है। युवाओं की अपनी नजर में सही रोजगार के अवसर के लिए वे इंतजार करते रहते हैं, अथवा अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं।
    आज विशेष रूप से भारत में रोजगार के अवसरों की कमी नहीं है। युवाओं में कौशल एवं मानसिकता का अभाव एवं केवल सरकारी नौकरी को ही रोजगार के अवसर के लिए चुनना ही भारत में श्रम की भागीदारी में कमी के लिए जिम्मेदार तत्व हैं। अधिक डिग्रियां प्राप्त करने वाले युवा रोजगार के अच्छे अवसर तलाश करने में ही लंबा समय व्यतीत कर देते हैं। कम डिग्री प्राप्त एवं कम पढ़े-लिखे नागरिक छोटी उम्र से ही रोजगार प्राप्त कर लेते हैं।

    यह भी कटु सत्य है कि डिग्री प्राप्त करने एवं वास्तविक धरातल पर कौशल विकसित करने में बहुत अंतर है। आज भी भारत में कई कंपनियों को शिकायत है कि देश में इंजीनीयर्स तो बहुत मिलते हैं परंतु उच्च कौशल प्राप्त इंजीनीयर्स की भारी कमी है। तमिलनाडु में किए गए एक अध्ययन में तथ्य उभर कर   आया है कि किसी भी देश के नागरिक जब अधिक उम्र में रोजगार प्राप्त करते हैं, तो उनकी कुल उम्र भर की कुल वास्तविक औसत आय बहुत कम हो जाती है। इसके विपरीत जो नागरिक अपनी उम्र के शुरुआती पड़ाव में ही रोजगार प्राप्त कर लेते हैं, उनकी कुल उम्र भर की वास्तविक औसत आय तुलनात्मक रूप से बहुत बढ़ जाती है। भारत में स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जाना चाहिए एवं युवाओं को सरकारी नौकरी की चाहत को छोडक़र निजी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त करने के प्रयास करने चाहिए। युवाओं को अपने स्वयं के व्यवसाय प्रारंभ करने के प्रयास भी करने चाहिए।

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